मतांतरण के बाद भी ले रहे थे छात्रवृत्ति और आरक्षण लाभ
पंजाब शिक्षा विभाग ने SC कोटे में धर्म परिवर्तन के बाद भी लाभ ले रहे परिवारों पर सख्ती शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब एफिडेविट और जांच के आधार पर छात्रवृत्ति, फीस छूट बंद कर रिकवरी की जाएगी।
पंजाब में अनुसूचित जाति कोटे की सुविधाओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के शिक्षा विभाग को मिली शिकायतों में सामने आया है कि कई परिवार मतांतरण करने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में पुराने धर्म के आधार पर एससी वर्ग की छात्रवृत्ति, फीस छूट और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने ऐसे मामलों पर सख्ती शुरू कर दी है। ऐसे लोगों की सुविधाएं बंद कर उनसे रिकवरी की जाएगी।
विभाग ने स्कूलों में पढ़ने वाले एससी विद्यार्थियों के अभिभावकों से धर्म और जाति संबंधी हलफनामा लेने के आदेश जारी किए हैं। इसमें यह बताना अनिवार्य होगा कि परिवार ने मतांतरण किया है या नहीं, और यदि किया है तो कब किया। इसके साथ मतांतरण का प्रमाणपत्र ना भी जरूरी होगा। यह कार्रवाई 24 मार्च 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि कन्वर्जन के बाद एससी का दर्जा और उससे जुड़े आरक्षण लाभ समाप्त हो सकते हैं। ऐसे में दोहरी पहचान और दोहरा लाभमान्य नहीं होगा। गलत जानकारी देने पर सामान्य धाराओं में केस दर्ज होने की संभावना भी जताई गई है।
जांच करेंगे कब बदला धर्म
स्कूल और विभागीय अधिकारी यह जांच करेंगे कि संबंधित परिवार ने किस तारीख या वर्ष में धर्मपरिवर्तन किया। इसके लिए पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाले जाएंगे। यदि जांच में यह सामने आता है कि धर्मपरिवर्तन के बाद भी एससी कोटे का लाभ लिया गया, तो छात्रवृत्ति, फीस छूट और अन्य सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद की जा सकती हैं। कुछ मामलों में रिकवरी व कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
पांचजन्य