RSS महासचिव के बयान पर बंटे लोग
संघ कई बार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर चुका है। संघ की तरफ से कई मौकों पर अखंड भारत की बात भी होती रही है। लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर कहा कि बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना जरूरी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर कहा कि बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आम जनता और गैर-सरकारी लोग शांति व संवाद के लिए पहल करें। नागरिक समाज के रिश्ते बहुत अहम होते हैं। हमारे सांस्कृतिक संबंध भी हैं। हम कभी एक ही देश का हिस्सा रहे हैं। इसलिए कम से कम कुछ लोगों को इन बातों पर जोर देते रहना चाहिए। होसबोले के बयान पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया आई।
अखंड भारत का सपना
क्या संघ के विचार बदल रहे हैं? RSS के एक सीनियर प्रचारक से जब यही पूछा तो उन्होंने कहा कि होसबोले ने नागरिक समाज की बात की है और उसे उसी रूप में देखना चाहिए। वैसे, संघ कई बार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर चुका है। संघ की तरफ से कई मौकों पर अखंड भारत की बात भी होती रही है। पिछले साल ही RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान को भारत के घर के एक कमरे की तरह बताया और कहा कि इस पर फिर से डेरा डालना है। साथ ही कहा कि वह पाकिस्तान नहीं, अविभाजित भारत है।
संघ प्रमुख ने कुछ साल पहले एक कार्यक्रम में अखंड भारत को लेकर कहा था कि परिस्थितियां अब ऐसी करवट ले रही हैं, जो भारत से अलग हुए हैं, उनको लगने लगा है कि गलती हो गई, हमको फिर से भारत में होना चाहिए। इससे पहले भागवत ने एक तरह से टाइमलाइन भी दी थी। तब उन्होंने कहा था कि 20-25 साल में तो अखंड भारत बन जाएगा, लेकिन हम कोशिश करेंगे तो 15 साल में भी ऐसा हो सकता है।
सोशल मीडिया पूछ रहा सवाल
वैसे, होसबोले के बयान पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उससे साफ है कि हमारे राजनेताओं को ‘सिर्फ विरोध करना है’ के सिंड्रोम से बाहर निकलना चाहिए। कांग्रेस ने अटैक करते हुए कहा कि RSS का पाकिस्तान प्रेम फिर सामने है। सवाल यह है कि शांति कौन नहीं चाहता, युद्ध किसे पसंद है? आम आदमी लड़ाई नहीं चाहता। हां…हथियार बेचकर मुनाफा कमाने वाले जरूर जंग का आसरा लगाए रहते हैं। सोशल मीडिया पर लोग यह भी लिख रहे हैं कि अगर यही बात संघ महासचिव के अलावा किसी और ने कही होती तो उसे कुछ लोग देशविरोधी घोषित कर देते। लोगों की इस बात में दम तो है, लेकिन अगर अमन की बात की जा रही है, तो उससे सुनने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।
युद्ध सबसे आखिरी विकल्प
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी कई लोग युद्धोन्माद फैला रहे थे जबकि खुद कई युद्ध देख चुके तमाम रिटायर्ड मिलिट्री ऑफिसरों का कहना था कि जंग को ग्लैमराइज नहीं करना चाहिए और युद्ध हमेशा आखिरी विकल्प होता है। लड़ाई किसी के हित में नहीं होती। करगिल विजय दिवस में महाराष्ट्र के बीड जिले की प्राजक्ता मिली थीं। वह जब केवल 14 महीने की थीं, तब उनके पिता ने देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी। प्राजक्ता ने कहा था, ‘एक शहीद के परिवार को तो लगता है कि युद्ध होना ही नहीं चाहिए। करगिल की लड़ाई खत्म हो गई, पर हमारे लिए वह आज भी चल रही है।’
नवभारत टाइम्स