असीम मुनीर हाथ में लेना चाहते हैं ताकत, बदलेगा संविधान?
पाकिस्तान बनने के बाद से अब तक देश की शासन प्रणाली पर सेना का दबदबा रहा है। इसमें लंबे समय तक देश में सैन्य शासन का दौर भी शामिल है, लेकिन अब सैन्य नेतृत्व बड़ी योजना पर काम कर रहा है।
20 अगस्त, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है, जो आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर को और ताकतवर बना देगा। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का सैन्य तंत्र 10 साल की राष्ट्रीय योजना पर काम कर रहा है। यह बदलाव पहले से ही ताकतवर सेना की देश पर पकड़ को और मजबूत करेगा। प्रस्तावित योजना में आर्थिक सुधार के साथ ही बड़े संवैधानिक बदलाव भी हो सकते हैं।
CNN-न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, जिन सुधारों पर चर्चा हो रही है उनमें राष्ट्रपति शासन प्रणाली, नए प्रांतों और प्रशासनिक इकाइयों का गठन, केंद्र और प्रांतों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे में बदलाव शामिल हैं। पाकिस्तान बनने के बाद से ही देश की राजनीति और विदेश नीति पर सेना का मजबूत हस्तक्षेप रहा है। लेकिन नई योजना का मकसद उस दबदबे को औपचारिक रूप देना है।
सरकार के बराबर खड़ी होगी सेना
इसमें सबसे अहम प्रस्ताव यह है कि सेना को सरकार के फैसलों में बराबर की भूमिका दी जाए। इस प्रस्ताव को ऐसे समय में लाने की तैयारी है, जब पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। भारत कर्ज, राजनीतिक विभाजन और नागरिक सरकार की कार्यक्षमता पर लगाता उठते सवालों ने पाकिस्तान को एक नाकाम देश के रूप में स्थापित किया है।
हालांकि, पाकिस्तान की राजनीतिक पर सेना की मजबूत पकड़ रही है लेकिन सैन्य नेतृत्व देश की बर्बादी का ठीकरा राजनीतिक दलों पर फोड़ रहा है। सेना का शीर्ष नेतृत्व शासन की नाकामी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं के लिए सत्ता का कुछ खास परिवारों में सिमटे रहने को वजह बताया है। इसमें शरीफ और भुट्टो/जरदारी परिवार लंबे समय तक सत्ता में रहे हैं।
संसदीय की जगह राष्ट्रपति शासन प्रणाली
पाकिस्तान की नई योजना में संसदीय प्रणाली से राष्ट्रपति प्रणाली की ओर बदलाव की बात हो रही है। यह तुर्की और मिस्र के मॉडल से प्रेरित है, जहां राष्ट्रपति के पास बहुत अधिकार हैं। इस प्रस्ताव के पीछे जनरल मुनीर की मजबूत सोच है कि एक मजबूत राष्ट्रपति पद से फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
जनरल मुनीर का मानना है कि पूरे डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्राध्यक्षों के साथ सीधे संपर्क अमेरिका और चीन जैसी बड़ी ताकतों के साथ बातचीत में पाकिस्तान की स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि, यह आसान नहीं होगा। राष्ट्रपति मॉडल के लिए बड़े संवैधानिक बदलावों की जरूरत होगी और इससे राजनीतिक दलों से कड़ा विरोध हो सकता है।
नए राज्य बनाने की योजना
पाकिस्तान में नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित 28वां संविधान संशोधन इसके लिए जरिया बन सकता है। हालांकि, इसे किस तरह से किया जाएगा, इसकी जानकारी अभी साफ नहीं है। राजनीतिक पहलू के साथ ही आर्थिक पहलू के भी चलने की उम्मीद है। पाकिस्तान ने निवेश, खनिज, खनन और रक्षा से जुड़े उद्योगों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर केंद्रित 10 साल का आर्थिक रोडमैप तैयार किया है।
नवभारत टाइम्स