रजिन्द्र बंसल

2014 से 2024 भाजपा+अपना दल को 2014 में 3.50 करोड़ वोट, 2017 में भाजपा +अपना दल 3 करोड़ 52लाख 50 हजार वोट, 2019 में भाजपा अपना दल,सुहेल देव 4करोड़ 41 लाख , 2022 में भाजपा अपना दल सुहेलदेव का वोट 4करोड़ सात लाख व 2024 में भाजपा, आर एल डी, सुहेलदेव, अपना दल का वोट करीब 3 करोड़ 84 लाख है।
वही 2014 में भाजपा के खिलाफ बीएसपी, समाजवादी आप कांग्रेस आर एल डी करीब 4करोड़ 15 लाख जिसमें बी एस पी 1.59 करोड़ कांग्रेस 60लाख व समाजवादी 1.80करोड़ है।
2017 में पोलिंग 49 लाख ज्यादा हो भाजपा लगभग उतना ही पर भाजपा विरोधी में बी एस पी कांग्रेस समाजवादी,आर एल डी 4.51 लाख।
2019 में भाजपा+करीब 4.4करोड़ व समाजवादी, कांग्रेस बी एस पी को करीब 3.74 करोड़ ,आर एल डी 14.47 लाख कुल 3.88 करोड़ वोटर भाजपा से दूर रहा।
2022 में 90 लाख नया वोटर जुड़ा सुहेल देव भाजपा, अपना दल का वोट करीब 4.10 करोड़ व समाजवादी, कांग्रेस बी एस पी को करीब 4.35 करोड़ वोट मिला। आर एल डी का वोट 26.30 लाख रहा। 2019 से करीब 50लाख वोट ज्यादा पोल हुई।
2022 में बी एस पी करीब 48 लाख वोट के नुक्सान में रही। कांग्रेस करीब 33 लाख वोट के नुक्सान में रही। आर एल डी को 12 लाख का फायदा रहा। पर एस पी ने सीधे सीधे 1.40 करोड़ की छलांग लगाई। कांग्रेस का 33 लाख बी एस पी का 48 लाख जोड़ हुआ 81 लाख पर समाजवादी ने इस 81 लाख, 14 लाख भाजपा से कम हुआ कुल 95 लाख + 50लाख वोट जो अधिक पोल हुआ सब समाजवादी की तरफ चले गये। ये क्यों और कैसे हुआ पर मंथन हो जाता तो 2024 में यू पी में भाजपा + आर एल डी को साथ लेने के बाद भी इतना नहीं पिछड़ता।
2024 में भाजपा का वोट +आर एल डी एक्स्ट्रा 2022 से भी 20 लाख कम केसे और क्यों हुआ। जब की 22लाख नये वोटर जुड़ने के बाद भी पोलिंग 2022 से 47 लाख कम हुई। और भाजपा विरोधी में वोट बी एस पी, समाजवादी, कांग्रेस 4.60 करोड़ हो गया। इसमें आजाद समाज का वोट समिल्लित नहीं है।
यहां भी बी एस पी का वोट 36 लाख कम हुआ। समाजवादी उतनी ही रही कांग्रेस को 60 लाख का फायदा हुआ।
इसमें जो 2019 के बाद जो भी नया वोटर जुड़ा या मायावती को नुक्सान हुआ उसे भाजपा अपनी और नहीं ला पाई। और तो और 2024 में जो कम वोटिंग हुई उसका नुक्सान भी भाजपा + को रहा।
शायद भाजपा का वोटर स्पोर्टर, कार्यकर्ता व स्थानीय नेता बड़ी जीत का आत्म विश्वास पाले वोट देने गये ही नहीं। और उन्हें बूथ पर लाने का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ । तभी राम मंदिर बनने के बाद उत्तर भारत के भाजपामयी होने के बावजूद यू पी में भाजपा को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ा।
इन आंकड़ों के आधार पर मेरा तो आकलन यही है। और अधिक स्टीक आकलन के लिये बूथ स्तर तक आंकड़ों के अध्ययन की जरूरत है।
पर मोटे तौर पर मेरी राय में 2019 से 2024 के बीच नये वोटर जो 80 लाख के करीब असामान्य बढ़ोतरी हुई है। सारी मार उसी कारण पड़ी है।
एस आई आर के बाद भी नयी वोटर लिस्ट में गलत नामों को कटवाने पर ही आगे की राह आसान हो सकती है।