7 से 13 साल के बच्चे किए जा रहे भर्ती
पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा स्कूलों में 7-13 साल के बच्चों को “बाल जिहादी” बनाने में जुटे हैं। वे मुफ्त भोजन, मासिक भत्ता और जिहादी शिक्षा का लालच देकर गरीब परिवारों के बच्चों को भर्ती कर रहे हैं।
24 मार्च, 2026 – श्रीनगर : पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने मजहबी जलसों, रैलियों और आतंकी शिविरों के बाद अब स्कूलों में भी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। आतंकी संगठनों ने इस्लाम, कश्मीर में जिहाद और शिक्षा के नाम पर आतंकियों की नई फौज तैयार करने के लिए छात्रों को भर्ती करना शुरू किया है।
बकायदा पाकिस्तान के प्रमुख शहरों के साथ गुलाम जम्मू-कश्मीर में विज्ञापन व पोस्टरों से अभिभावकों से सात से 13 साल तक के बच्चों को उनके द्वारा संचालित स्कूलों में दाखिला लेने की अपील की जा रही है। इसमें बच्चों को शिक्षा के साथ मुफ्त खाना और मासिक भत्ते का प्रलोभन दिया जा रहा है।
गुलाम जम्मू-कश्मीर के स्कूल में एक कार्यक्रम में आतंकी की वेशभूषा में बच्चा।
साथ ही इस्लाम की मान्यताओं के मुताबिक जंगी तालीम का वादा किया गया है। आतंकी संगठनों के लोग गुलाम जम्मू-कश्मीर में सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में जाकर जिहादी भाषण दे रहे हैं। आतंकियों की वेशभूषा में प्रतियोगिताएं और कश्मीर में मारे गए आतंकियों के महिमामंडन और मुस्लिम उत्पीड़न की झूठी कहानियों पर नाटक करवाए जाते हैं।
आतंकी संगठनों ने स्कूलों में आतंकी मानसिकता विकसित करने का षड्यंत्र बीते वर्ष सितंबर माह में आरंभ किया गया था। इसमें जैश अन्य आतंकी संगठनों से अधिक सक्रिय है। लश्कर की गतिविधियां सिर्फ उसके संगठनों द्वारा संचालित स्कूलों तक सीमित हैं। जैश सरकारी, गैर सरकारी और अन्य स्कूलों में भी पैठ बढ़ा रहा है।
छात्रों के लिए स्कूलों से बाहर जिहादी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ये संगठन मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाते हैं। गुलाम जम्मू-कश्मीर में कई ऐसे अभिभावकों ने अपने बच्चों को मौजूदा स्कूल से हटाकर, बहावलपुर, लाहौर, मुरीदके और कराची में इन आतंक की पाठशालाओं में भेजा है।
जिहाद के प्रति लोगों का मोहभंग होने के बाद बदली रणनीति
गुलाम जम्मू-कश्मीर में कश्मीर जिहाद के प्रति स्थानीय लोगों के होते मोहभंग को देखते हुए पाकिस्तानी सरकार और सेना ने जैश और लश्कर की गतिविधियों को बढ़ाया है। दरअसल, गुलाम जम्मू-कश्मीर में इन दोनों संगठनों में आतंकियों की भर्ती लगातार घट रही थी और लोग खुलकर इनके खिलाफ आवाज उठा रहे थे। साथ ही इनके ट्रेनिंग कैंप बंद करने की मांग कर रहे थे।
बच्चों के लिए हर साल जिहाद ट्रेनिंग में शामिल होना अनिवार्य
वर्ष 2010 में पाकिस्तान से लौट मुख्यधारा में शामिल हुए एक पूर्व कश्मीरी आतंकी ने कहा कि जैश और लश्कर पूरे पाकिस्तान में ऐसे परिवारों को टारगेट करते हैं, जो गरीब होते हैं। लोग अपने बच्चों को अच्छे की उम्मीद में इनके हवाले कर देते हैं, लेकिन यह बच्चे बाद में किलिंग मशीन बन जाते हैं।
इनके स्कूलों में इनकी मर्जी के बिना कोई दाखिल नहीं हो सकता। किसी बच्चे के अभिभावक भी नहीं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र के लिए हर साल किसी न किसी तरह की जिहाद ट्रेनिंग में शामिल होना जरूरी होता है।
- गुलाम जम्मू-कश्मीर में लश्कर और जैश ने अब स्कूलों में बढ़ाईं अपनी गतिविधियां।
- स्कूलों में छात्रों को कश्मीर जिहाद का पाठ पढ़ाया जा रहा, दिए जा रहे जिहादी भाषण।
- मुफ्त खाने और मासिक भत्ते के प्रलोभन के साथ युद्ध की तैयारी के पढ़ाए जा रहे पाठ।
- आतंकी संगठन मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को फांस रहे।
दैनिक जागरण