इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने पाकिस्तान को ‘विश्वसनीय मध्यस्थ’ नहीं माना। ईरान संघर्षविराम में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा- अमेरिका ने अपनी वजह से इस्तेमाल किया। लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायल का ऑपरेशन जारी।.
10 अप्रैल, 2026 – पाकिस्तान की तो अलग ही लेवल वाली इंटरनेशनल बेइज्जती हो गई है। ये बेइज्जती किसी और ने नहीं, बल्कि इजरायल ने कर दी है। जो पाकिस्तान दुनियाभर में झूठ का ढिंढोरा पीटकर खुद को शांति का मसीहा साबित करने में जुटा था, उसकी खुशी 24 घंटे भी नहीं टिकी। ईरान युद्ध में सीजफायर की शर्तों को लेकर पहले अमेरिका और अब इजरायल ने तो कह दिया है कि उसे तो पाकिस्तान पर भरोसा ही नहीं है।
भारत में राजदूत रियुवेन अजार ने कहा कि वे पाकिस्तान को भरोसेमंद खिलाड़ी नहीं मानते। उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के तौर पर नहीं देखते। मुझे लगता है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली सेवाओं का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।”
अजार ने ये बातें दिल्ली में एएनआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहीं। उन्होंने साफ किया कि इजरायल इस संघर्ष विराम का पूरा समर्थन करता है। अब अमेरिका की अगुवाई में बातचीत का दौर शुरू होने वाला है। इजरायल को उम्मीद है कि इन बातों से ईरान अपनी 15 सूत्री योजना की शर्तें पूरी करेगा। इसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोकना और बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बंद करना शामिल हो सकता है।
लेबनान पर इजरायल का फोकस
इजरायल का मुख्य मकसद दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है। अजार ने बताया कि इस ऑपरेशन का ईरान में चल रहे कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “तेल अवीव का मकसद दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के आतंकवाद को खत्म करना है।”
पिछले कुछ घंटों में इजरायल ने लेबनान में बड़ा ऑपरेशन चलाया, जिसमें 250 से ज्यादा हिज्बुल्लाह आतंकवादी मारे गए। इजरायल लिटानी नदी के दक्षिण में हिज्बुल्लाह की कोई भी मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करेगा। अजार ने जोर देकर कहा कि पिछले साल तय की गई संघर्षविराम की शर्तें हर हाल में बनी रहनी चाहिए। हिज्बुल्लाह को पूरी तरह निहत्था करना होगा और लेबनानी सरकार को इसमें ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
संघर्षविराम की शर्तें और स्पष्टीकरण
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का संघर्षविराम हुआ है, जिसमें दोनों तरफ से हमले रोकने का फैसला किया गया। इजरायल ने आधिकारिक तौर पर इसका समर्थन किया है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि लेबनान इस संघर्षविराम का हिस्सा नहीं है।
ईरान ने इजरायल पर आरोप लगाया है कि उसके लेबनान में हमले संघर्षविराम को खतरे में डाल रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा जारी रहा तो होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ सकता है। लेकिन इजरायल का कहना है कि लेबनान अलग मुद्दा है और वहां उसके ऑपरेशन जारी रहेंगे।
पाकिस्तान ने खुद को इन बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। लेकिन इजरायल के राजदूत ने इस भूमिका पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर इजरायल का भरोसा नहीं है। अमेरिका ने जो फैसला लिया है, वह अपनी जरूरत के हिसाब से है।
बातचीत में इजरायल उम्मीद जता रहा है कि अमेरिका की अगुवाई में होने वाली चर्चा से ईरान परमाणु हथियारों का खतरा खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता लाने वाली शर्तें मानेगा। अभी फिलहाल दोनों तरफ से संघर्ष रुका हुआ है, लेकिन लेबनान में इजरायल की कार्रवाई और और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अलग-अलग राय बनी हुई है।
पांचजन्य