होशियारपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी पर भव्य प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता, नशा मुक्ति और राष्ट्र प्रथम पर दिया ओजस्वी उद्बोधन।
14 अप्रैल, 2026 – होशियारपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक अवसर पर होशियारपुर नगर में एक भव्य “प्रमुखजन गोष्ठी” का आयोजन डी.ए.वी. कॉलेज ऑफ एजुकेशन के विशाल सभागार में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध, जागरूक एवं सक्रिय नागरिकों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रोत्थान की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित करने का एक सशक्त प्रयास रहा।
देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा ऐसे प्रमुखजन गोष्ठियों का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को समाज परिवर्तन के इस महत्त्वपूर्ण कार्य में सहभागी बनाना है। इसी क्रम में अखिल भारतीय स्तर के अधिकारियों का विभिन्न प्रांतों में प्रवास निरंतर जारी है, जिससे स्थानीय समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित कर राष्ट्रोत्थान के कार्य को गति दी जा सके। इस गोष्ठी में शिक्षा, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, उद्योग, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े प्रमुखजनों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
विशेष रूप से शिक्षाविदों की प्रभावशाली उपस्थिति इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता रही, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर, विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, विद्यालय एवं कॉलेज प्रबंधन से जुड़े सदस्य, शोधार्थी तथा शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त समाज जीवन के विविध क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवी, स्वयंसेवक एवं प्रबुद्ध नागरिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया। लगभग 300 गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण वैचारिक संगोष्ठी का स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अधिकारियों के परिचय से हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. अनूप कुमार जी (अध्यक्ष, डी.ए.वी. कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, होशियारपुर) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने का सशक्त साधन है। इस अवसर पर माननीय जिला संघचालक श्री अशोक चोपड़ा जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
पंच परिवर्तन से ही होगा समाज में परिवर्तन
गोष्ठी के मुख्य वक्ता माननीय इंद्रेश कुमार जी (अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने अपने ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन में संघ के शताब्दी वर्ष की ऐतिहासिक यात्रा, वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों तथा भविष्य के भारत के निर्माण में समाज की भूमिका पर विस्तारपूर्वक विचार व्यक्त किए। उन्होंने विशेष रूप से “पंच परिवर्तन” की अवधारणा को समाज परिवर्तन का मूल आधार बताते हुए इसे व्यवहारिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
आशा भोसले को दी श्रद्धांजलि
अपने उद्बोधन में उन्होंने अनेक समसामयिक एवं प्रेरणादायक विषयों पर भी प्रकाश डाला। आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत जीवन में ऊर्जा और जीवंतता का संचार करता है। युवाओं एवं विद्यार्थियों में “राष्ट्र प्रथम” की भावना जागृत करने पर बल देते हुए उन्होंने राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को आवश्यक बताया। खेलों में “राष्ट्र प्रथम” और “तिरंगा प्रथम” की भावना को भारत की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का आधार बताया।
उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव थापर, शिवराम राजगुरु तथा अशफाक उल्ला खाँ जैसे महान क्रांतिकारियों का स्मरण करते हुए उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को प्रेरणास्रोत बताया। सामाजिक समरसता पर बल देते हुए उन्होंने छुआछूत को सामाजिक एवं मानसिक कर्करोग बताया और इसे समाप्त करने के लिए जन-जागरूकता का आह्वान किया।
युवा शक्ति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नशा शरीर, मन और बुद्धि को नष्ट करता है, अतः “नशा मुक्त भारत” के निर्माण हेतु सभी को आगे आना होगा। वर्तमान वैश्विक संघर्ष की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत के बुद्धिजीवियों को विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
“ऑपरेशन सिंदूर” भारत की रणनीति एवं शक्ति का प्रतीक
उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” को आत्मनिर्भर भारत की रणनीति एवं शक्ति का प्रतीक बताते हुए स्वदेशी और स्वाभिमान को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही 22 से 27 जून तक आयोजित “सिंधु कुंभ” में सहभागिता का आह्वान करते हुए इसे राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “पंच परिवर्तन” केवल वैचारिक विषय नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है, जिसे अपनाकर समाज में स्थायी एवं सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है—
सामाजिक समरसता: समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर एकात्मता का भाव विकसित करना।
कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कार, संवाद और मूल्यों को सुदृढ़ करना।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति संतुलन हेतु जनभागीदारी बढ़ाना।
स्व बोध (स्वाभिमान एवं स्वावलंबन): स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
नागरिक कर्तव्य: अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करना।
गोष्ठी के दौरान उपस्थित प्रमुखजनों ने इन सभी विषयों पर गंभीर चिंतन किया तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें उपस्थित प्रमुखजनों ने अपने प्रश्न मुख्य वक्ता के समक्ष रखे और उनका संतोषजनक समाधान प्राप्त किया।
अंत में माननीय जिला संघचालक श्री अशोक चोपड़ा जी ने सभी अतिथियों एवं शिक्षाविदों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा सभी को राष्ट्रोत्थान के कार्य में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” के साथ हुआ। इस अवसर पर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्”, “एक हिंद जय हिंद”, “आवाज़ दो हम एक हैं” तथा “हम कौन—हिंदुस्तानी, हिंदुस्तानी” जैसे नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो उठा।
पांचजन्य