कहा- मलेरकोटला में न्यायिक ढांचा अधूरा, पंजाब से और क्या उम्मीद करें?
20 अप्रैल, 2026 – चंडीगढ़ : कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जब पंजाब सरकार सुविधाएं मुहैया करवा देगी तो याची अपनी मांगों के साथ दोबारा हाईकोर्ट की शरण ले सकता है।
मलेरकोटला को जिला बने 5 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वहां अब तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और स्थायी लोक अदालत का गठन नहीं होने को लेकर दाखिल जनहित याचिका का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार अभी तक जजों को मूलभूत सुविधाएं तो मुहैया करवा नहीं पाई है, कैसे अभी इन दोनों मांगों के पूरा होने की उम्मीद की जा सकती है।
कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जब पंजाब सरकार सुविधाएं मुहैया करवा देगी तो याची अपनी मांगों के साथ दोबारा हाईकोर्ट की शरण ले सकता है। याचिका में मोहाली निवासी एडवोकेट कुंवर पाहुल सिंह ने कहा कि मलेरकोटला को वर्ष 2021 में जिला घोषित किया गया था और 2024 में इसे सत्र प्रभाग का दर्जा भी मिल गया। इसके बावजूद आवश्यक न्यायिक और प्रशासनिक ढांचा विकसित नहीं किया गया।
यहां तक कि 2025 में उच्च न्यायालय की ओर से अलग DLSA के गठन की अधिसूचना जारी करने की मंजूरी मिलने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बुनियादी ढांचे के अभाव में मलेरकोटला में अभी तक जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियमित नियुक्ति संभव नहीं हो पाई है। परिणामस्वरूप, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्थायी लोक अदालत का गठन भी अटका हुआ है, जिससे आम लोगों को सस्ती और सुलभ न्याय व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराती तब तक इन संस्थाओं का प्रभावी गठन संभव नहीं है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि जैसे ही राज्य सरकार मलेरकोटला में जिला एवं सत्र न्यायालय के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराए, वह दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
अमर उजाला