कंगाल मुल्क पर लादीं 11 नई शर्तें
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के लिए जारी 7 अरब डॉलर के विस्तारित निधि सुविधा (IFF) कार्यक्रम में 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। इससे पहले से ही आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने की आशंका है। यूएई की कर्ज वापसी के कारण पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ा है।
30 अप्रैल, 2026 – इस्लामाबााद: पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और अब एक नई मुसीबत में फंस गया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने उसके सात अरब डॉलर के चल रहे एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (IFF) प्रोग्राम में 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, एक शर्त यह है कि सरकार स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZ) एक्ट और स्पेशल टेक्नोलॉजी जोन्स अथॉरिटी एक्ट में बदलाव करे।
IMF ने क्या शर्तें रखीं
इसका मकसद मौजूदा टैक्स छूट जैसी सुविधाओं को धीरे-धीरे खत्म करना और मुनाफे के आधार पर मिलने वाली राहत की जगह लागत के आधार पर राहत देना है। रिपोर्ट में एक और बात को लेकर चिंता जताई गई है कि सरकार कराची में 6000 एकड़ जमीन एसईजेड डेवलपर्स को बिना किसी शुल्क के लीज पर देने की योजना बना रही है।
पाकिस्तान की सरकारी खरीद में पारदर्शिता नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, यह भी अक्टूबर 2024 की शर्तों में शामिल था कि सरकार केंद्र और राज्यों के स्तर पर होने वाली सभी सरकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक पाकिस्तान एक्विजिशन एंड डिस्पोजल सिस्टम (ई-पैड्स) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
कंगाल पाकिस्तान बन रहा ‘शांति दूत’
इस बीच, पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक हालत फिर से चर्चा में आ गई है। खासकर बदलते वैश्विक हालात के बीच। एक तरफ पाकिस्तान खुद को दुनिया में शांति की आवाज के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन अंदर से उसकी आर्थिक स्थिति काफी दबाव में है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान ने कूटनीतिक कोशिशें कीं, लेकिन उसी समय उसकी आर्थिक कमजोरी भी सामने आ गई।
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के जमा पैसे वापस ले लिए, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर तुरंत दबाव बढ़ गया। हालांकि महंगाई कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन IFF की सलाह पर ब्याज दरें अभी भी ज्यादा हैं। इससे निवेश और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं, और अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार में फंसी हुई है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की बाहरी आर्थिक स्थिति अभी भी काफी कमजोर बनी हुई है।
नवभारत टाइम्स