कोई गरीब की बेटी तो किसी ने 102 डिग्री बुखार में जीता गोल्ड
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की 8 महिला एथलीटों ने अलग-अलग खेलों गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। बता दें कि भारत ने कुल 13 मेडल जीते हैं।
03 अगस्त, 2026 – कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीटों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया, जिसमें भारत की बेटियों की भूमिका सबसे अहम रही। भारत द्वारा जीते गए कुल 13 गोल्ड मेडल में से 8 गोल्ड अकेले महिला एथलीटों के नाम रहे। यानी कि आधे से भी ज्यादा। वेटलिफ्टिंग, पैरा-एथलेटिक्स, जूडो और बॉक्सिंग के मंच पर भारत की इन 8 चैंपियनों ने गोल्डन इतिहास रचा।
मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग – 48kg)
भारत के गोल्डन अभियान की शुरुआत स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने की। महिलाओं के 48 किलो ग्राम भारवर्ग में उतरकर उन्होंने न केवल भारत को प्रतियोगिता का पहला गोल्ड मेडल दिलाया, बल्कि एक नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
शर्मिला धनखड़ (पैरा-एथलेटिक्स – शॉट पुट F57)
पैरा-एथलेटिक्स के मैदान पर शर्मिला धनखड़ ने भारत का दूसरा गोल्ड मेडल पक्का किया। महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शर्मिला ने अपने पहले थ्रो से ही बढ़त बना ली थी और विरोधी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पोडियम पर पहला स्थान हासिल किया। शर्मिला की कहानी काफी भावुक करने वाली रही है। 2 साल की उम्र में उन्हें पोलियो जैसी गंभीर बीमारी हुई, इसके अलावा अपनी पहली शादी में उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा, लेकिन आज भारत के लिए गोल्ड जीतकर उन्होंने खुद को साबित किया है।
अस्मिता डे (जूडो – 48kg)
ग्लासगो में अस्मिता डे ने वो कर दिखाया जो इतिहास में कोई भारतीय जूडो खिलाड़ी नहीं कर पाया था। महिलाओं के 48 किलो ग्राम वर्ग के फाइनल में अपने सटीक दांव-पेच और आक्रामक रणनीति के दम पर जीत दर्ज कर अस्मिता ने जूडो में भारत को अब तक का पहला ऐतिहासिक गोल्ड मेडल दिलाया। अस्मिता डे ने पिछले साल अपने पिता को खो दिया था, गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह अपने पिता को याद करके रोती हुई नजर आईं थी।
साक्षी चौधरी (बॉक्सिंग – 51kg)
बॉक्सिंग रिंग में गोल्डन पंचों की शुरुआत साक्षी चौधरी ने की। 51kg भारवर्ग में साक्षी ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक रणनीति अपनाई और फाइनल मुकाबले में एकतरफा जीत हासिल कर भारतीय मुक्केबाजी टीम के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता।
प्रीति पवार (बॉक्सिंग – 54kg)
54kg भारवर्ग के फाइनल में उतरीं प्रीति पवार ने अपनी बेहतरीन स्पीड और काउंटर-अटैक तकनीक से विरोधी बॉक्सर को पस्त कर दिया। कड़े मुकाबले में संयम और डिफेंस का शानदार संतुलन बनाते हुए प्रीति ने भारत की झोली में दूसरा बॉक्सिंग गोल्ड डाला।
जैस्मीन लम्बोरिया (बॉक्सिंग – 57kg)
महिलाओं के 57kg किलो ग्राम में जैस्मीन लम्बोरिया ने अपनी लंबी रेंज और रणनीतिक समझ का परिचय दिया। दूर से ही सटीक जैब और हुक लगाकर पॉइंट बटोरे और सर्वसम्मति से जजों का फैसला अपने हक में कराकर भारत के लिए गोल्डन पंच जड़ा।
प्रिया घांघस (बॉक्सिंग – 60kg)
भिवानी के धनाना गांव की रहने वाली प्रिया घांघस ने 60 किलो ग्राम भारवर्ग के फाइनल में कनाडा की बॉक्सर को मात दी। पहले राउंड में पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए प्रिया ने 4-1 से मुकाबला जीतकर भारत को बॉक्सिंग में चौथा गोल्ड मेडल दिलाया। प्रिया के गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनके पिता ने बताया की वह देशी खाना और चूरमा खाती हैं। जो उनकी डाइट का अहम हिस्सा है।
अरुंधती चौधरी (बॉक्सिंग – 70kg)
महिला मुक्केबाजी में भारत का 5वां और कुल 8वां महिला गोल्ड मेडल अरुंधती चौधरी ने 70 किलो ग्राम वर्ग में जीता। अरुंधती ने विरोधी बॉक्सर के हमलों से बचते हुए सटीक काउंटर पंच मारे और 5-0 से मुकाबला अपने नाम किया। अरुंधती चौधरी ने 102 डिग्री बुखार में अपनी फाइट लगी थी।
नवभारत टाइम्स