21 अगस्त, 2026 – जालंधर : भाषा की समस्या और पुलिस पर भरोसे की कमी के कारण कई पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते। कुछ प्रवासियों में अपनी आव्रजन स्थिति को लेकर भी डर रहता है। ऐसे में नफरत से प्रेरित घटनाओं की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
अमेरिका में कुल नफरती अपराधों में कमी आई है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, इनमें करीब सात फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, सिख समुदाय के खिलाफ दर्ज अपराधों में 24.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। हिंदू समुदाय के खिलाफ भी नफरत से प्रेरित मामलों में करीब 12 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
वर्ष 2025 में 189 सिख विरोधी पूर्वाग्रह से जुड़े अपराध दर्ज किए गए। हिंदुओं के खिलाफ ऐसे 32 मामले सामने आए। 2015 से 2025 के बीच सिखों के खिलाफ नफरती अपराधों में करीब 3700 फीसदी की भारी वृद्धि हुई है। 2015 में केवल छह मामले थे, जो 2025 में करीब 200 तक पहुंच गए।
कई घटनाओं की शिकायत नहीं होती
सिख संगठनों का कहना है कि सरकारी आंकड़े वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाते। कई घटनाओं की शिकायत पुलिस तक नहीं पहुंच पाती। प्रवासियों के खिलाफ बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी एक कारण है। सिख धर्म की पहचान को लेकर जानकारी का अभाव भी एक प्रमुख वजह है। पगड़ी और दाढ़ी के कारण सिखों की गलत पहचान भी होती है।
सिख समुदाय ने सिख और पंजाबी ट्रक चालकों को लेकर विशेष चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बताने वाली भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। इससे चालकों को नस्लीय टिप्पणियों और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। कैलिफोर्निया के नॉर्थ हॉलीवुड में एक बुजुर्ग सिख पर हमला हुआ। सिख संगठनों ने इस मामले में नफरती अपराध के पहलू से जांच की मांग की है। ट्रेसी शहर में 57 वर्षीय सिख अवतार सिंह के अपहरण और हत्या ने भी समुदाय को झकझोर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, FBI के आंकड़े वास्तविक स्थिति से कम हो सकते हैं। भाषा की समस्या और पुलिस पर भरोसे की कमी के कारण कई पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते। कुछ प्रवासियों में अपनी आव्रजन स्थिति को लेकर भी डर रहता है। ऐसे में नफरत से प्रेरित घटनाओं की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। सिख संगठनों के अनुसार, नस्लीय भेदभाव और धार्मिक पहचान के आधार पर हमले केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। ब्रिटेन सहित कई पश्चिमी देशों में भी सिख समुदाय को ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
नस्लीय भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना जरूरी
संगठनों ने सरकारों से मांग की है कि धार्मिक या नस्लीय पूर्वाग्रह वाले मामलों की गंभीरता से जांच हो। इनकी सामान्य अपराध के साथ-साथ नफरती अपराध के पहलू से भी जांच होनी चाहिए। अमेरिका में सिख समुदाय की बढ़ती आबादी और सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका है। इसलिए धार्मिक पहचान और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। पगड़ी और दाढ़ी किसी व्यक्ति को निशाना बनाने का कारण नहीं हैं। ये उनकी धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
अमर उजाला