‘स्पेस टेक्नोलॉजी में जेन-जी की प्रतिभा और निजी स्टार्टअप्स भारत की नई ताकत’
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर जेन-जी और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की सराहना की,
इसे भारत की वैश्विक बढ़त और निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बताया।
24 अगस्त, 2026 – नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (नेशनल स्पेस डे) पर देशवासियों और विज्ञानिकों को बधाई दी।
उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की तरक्की और नई तकनीकें विकसित करने के लिए ‘जेन-जी’ की अहम भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक बढ़त ने भारत को निवेशकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बना दिया है।
पीएम मोदी ने शेयर किया वीडियो
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषणों का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, मैंने अयोध्या में कहा था कि यह बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत है। इस नए दौर में भारत वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है और यह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम में साफ तौर पर दिखाई देता है।
हमने मिलकर 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में अंतरिक्ष क्षेत्र की अहम भूमिका है।
देश के युवाओं की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, आज जेन-जी के इंजीनियर, डिजायनर, कोडर और विज्ञानी नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं। चाहे प्रोपल्शन सिस्टम हो, कम्पोजिट मटीरियल हो, राकेट स्टेज हों या सैटेलाइट प्लेटफार्म हों- भारत के युवा ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी कुछ समय पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
प्राइवेट स्पेस सेक्टर की प्रशंसा की
उन्होंने देश के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की भी प्रशंसा की और कहा, भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की प्रतिभाएं दुनिया में अपनी पहचान बना रही हैं। आज भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसरो भारत की अगली पीढ़ी के विज्ञानियों को प्रेरित कर रहा है। इसरो की सफलता को देखकर कई बच्चे सोचते हैं कि बड़े होकर वे भी विज्ञानी बनेंगे।
स्पेस इकोनमी 44 अरब डालर तक पहुंचने की उम्मीद
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को अहमदाबाद में कहा कि भारत की स्पेस इकोनमी 2033 तक लगभग 8.4 अरब डालर से बढ़कर लगभग 44 अरब डालर तक पहुंचने का अनुमान है।
आईएएनएस के अनुसार, द फोरम कंवेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा कि स्पेस इकोनमी के विस्तार को केवल उसके वित्तीय मूल्य से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि भारत की उन्नत तकनीकें विकसित करने, उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा करने और घरेलू चुनौतियों के लिए तकनीक-आधारित समाधान खोजने की क्षमता से भी मापा जाना चाहिए।
भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा
इसरो के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग सचिव डा. वी. नारायणन ने कहा कि भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहा है और प्रस्तावित ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के पहले माड्यूल को मंजूरी भी मिल चुकी है।
उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर जोर देते हुए कहा कि देश अब 50 से अधिक क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है, जिनसे सीधे नागरिकों को फायदा हो रहा है।
नारायणन ने गगनयान समेत देश के कुछ प्रमुख आगामी अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रूपरेखा भी बताई और बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में साधारण शुरुआत करके भारत नौ क्षेत्रों में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
साथ ही कहा भारत के स्पेस सेक्टर में अब लगभग 440 स्टार्टअप हैं, जो उस इंडस्ट्री में निजी हिस्सेदारी में एक बड़ा इजाफा दिखाता है जिस पर कभी सरकारी संस्थाओं का दबदबा था।
दैनिक जागरण