11सिंतबर, 1911 में भारत के पहले सेंचुरियन लाला अमरनाथ का जन्म हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 1933-34 में खेले गए डेब्यू टेस्ट में सेंचुरी लगाई थी। लाला अमरनाथ ने गेंदबाजी में भी कमाल किया था।

आज (11सिंतबर) ही के दिन 1911 में भारत के पहले सेंचुरियन लाला अमरनाथ का जन्म हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 1933-34 में खेले गए डेब्यू टेस्ट में सेंचुरी लगाई थी, यह किसी भी भारतीय बल्लेबाज के द्वारा लगाई गई पहली टेस्ट सेंचुरी थी। इस मैच में लाला अमरनाथ ने 118 रन बनाए थे, यह उनके करियर का उच्चतम स्कोर भी है। वह स्वतंत्र भारत के पहले टेस्ट कैप्टन भी थे, उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को पाकिस्तान के खिलाफ 1952-53 में खेली गई पहली आधिकारिक टेस्ट सीरीज में जीत दिलाई थी।
लाला अमरनाथ का पूरा नाम नानिक अमरनाथ भारद्वाज था। उनका जन्म पंजाब के कपूरथला में हुआ था और वर्तमान पाकिस्तान के लाहौर में उनकी परवरिश हुई। इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मैच में लगाया गया शतक उनके टेस्ट करियर का एकमात्र शतक है।
लाला अमरनाथ ने अपने करियर में कुल 24 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने कुल 878 रन बनाए। उनके नाम कुल 1 शतक और 4 अर्धशतक है। इसके अलावा 186 फर्स्ट क्लास मैचों में उन्होंने 41 की औसत से 10426 रन बनाए हैं। उन्होंने 31 शतक और 39 अर्धशतक जड़ा है।
लाला अमरनाथ बेहद ही सटीक लाइन लेंथ से गेंदबाजी करते थे, वो दुनिया के इकलौते गेंदबाज हैं जिन्होंने सर डॉन ब्रैडमैन (Don Bradman) को हिटविकेट करने का कारनामा किया है। 1947 में अमरनाथ ने ब्रिसबेन टेस्ट के दौरान ब्रैडमैन को हिटविकेट किया था। अमरनाथ के नाम टेस्ट क्रिकेट में 45 विकेट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 463 विकेट दर्ज है।
पाकिस्तान के खिलाफ पहली आधिकारिक टेस्ट सीरीज में लाला अमरनाथ के नेतृत्व में भारतीय टीम ने 2-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। भारत में हुई इस सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को पारी और 70 रनों से हराया था, दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान ने भारत को पारी और 43 रन से हराया। तीसरे टेस्ट में भारत ने वापसी की और पाकिस्तान को 10 विकेट से हराया था, जबकि चौथा और पांचवां टेस्ट मैच ड्रॉ रहा था।
इन फैसलों से लाला ने सबको चौंकाया
पाकिस्तान के खिलाफ 1952 में ही ईडन गार्डन्स में हुए टेस्ट मैच के बाद लाला ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। लेकिन यह क्रिकेट में उनके योगदान का अंत नहीं बल्कि एक और शुरुआत थी। उन्होंने संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट के चयनकर्ता, मैनेजर, कोच और प्रसारक के रूप में काम किया था। चयनकर्ता के अध्यक्ष के तौर पर 1959-60 का किस्सा बड़ा चर्चित है जब उन्होंने एक ऐसे ऑफ स्पिनर (जसु पटेल) की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एंट्री कराई थी जो दूर-दूर तक टीम का हिस्सा नहीं था।
कानपुर की पिच को पढ़ते ही उन्होंने यह फैसला लिया था। बाद में पटेल ने उस मैच में अपनी गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी थी और भारत को एक ऐतिहासिक जीत मिली थी। ऐसे ही 1960 का एक किस्सा है जब ईरानी का सबसे पहला मैच हो रहा था। दिल्ली के करनैल सिंह स्टेडियम में खेले गए इस मैच में लाला के एक और फैसले ने उनकी क्रिकेट समझ को पुख्ता किया था। लाला तब रेस्ट ऑफ इंडिया का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। लेकिन मैच के समय उनको चोट लग गई थी। तब उन्होंने टीम की बैटिंग लाइन में एक ऐसे खिलाड़ी को उतारने का फैसला किया जो वास्तव में टीम का हिस्सा नहीं था।
यह था 12वां खिलाड़ी, तब यह एक तरह से क्रिकेट के नियमों की अवहेलना ही थी। लाला अमरनाथ और अंपायर इस पर राजी थे। प्रेम भाटिया को लाला अमरनाथ ने 12वें खिलाड़ी की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिन्होंने पहली पारी में 9वें और दूसरी पारी में तीसरे नंबर पर बैटिंग करते हुए क्रमश 22 और 50 रन बनाए थे। इसके सालों बाद आईसीसी ने सब्स्टीट्यूट का नियम लागू किया था। यानी एक ऐसा खिलाड़ी जो मूल रूप से टीम का हिस्सा नहीं होता था, लेकिन किसी चोट या ऐसी घटना के कारण टीम में जगह बना सकता था। 5 अगस्त, 2000 को भारतीय क्रिकेट के आइकन लाला अमरनाथ ने दुनिया को अलविदा कह दिया गया था।
लाला अमरनाथ का निधन 88 साल की उम्र में 5 अगस्त 2000 को हुआ। उनके बेटों सुरिंदर, मोहिंदर और रजिंदर ने भी पिता की तरह क्रिकेट को अपना करियर चुना। सुरिंदर अमरनाथ ने भी पिता की ही तरह अपने डेब्यू मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जमाया। हालांकि सुरेंदर केवल 9 टेस्ट ही खेल पाए। वहीं उनके छोटे भाई उनसे कहीं आगे निकले। मोहिंदर ने 69 टेस्ट मैच खेलकर 11 शतक जमाए थे। भारत की 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम में भी मोहिंदर की अहम भूमिका अहम थी। रजिंदर कोई अंतरराष्ट्रीय मैच तो नहीं खेल पाएं, लेकिन उन्होंने काफी वक्त तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच खेला।