काहे का रक्षा समझौता… हूती के खिलाफ अब इजरायल से लगाई आस
सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ पाकिस्तान से जिस सैन्य मदद की उम्मीद थी, वह फिलहाल पूरी होती नजर नहीं आ रही है। इस्लामाबाद ने यमन में सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
16 सितंबर, 2026 – नई दिल्ली : सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ पाकिस्तान से जिस सैन्य मदद की उम्मीद थी, वह फिलहाल पूरी होती नजर नहीं आ रही है।
इस्लामाबाद ने यमन में सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ऐसे में हूती के बढ़ते हमलों के बीच रियाद की नजर अब इजरायल से संभावित खुफिया और सुरक्षा सहयोग पर टिक गई है।
खास बात यह है कि सऊदी अरब ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है और दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध भी नहीं हैं।
सऊदी अरब ने अगस्त में तुर्किए और पाकिस्तान के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया था। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाना है। इसके बावजूद हूती के साथ जारी तनाव में पाकिस्तान ने विदेशी धरती पर युद्ध अभियान में शामिल होने को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है।
पाकिस्तान देगा रक्षा तंत्र, सैनिक नहीं
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती ने यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कायम कर रखा है और लाल सागर तथा बाब अल-मंदेब क्षेत्र में उसकी गतिविधियों से सऊदी अरब की सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ा है।
पाकिस्तान ने हूती के खिलाफ अपने सामरिक हथियार या सैन्य बल तैनात करने से इनकार किया है। हालांकि, सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए रक्षा प्रणालियां उपलब्ध कराने पर वह तैयार है। इसका अर्थ है कि इस्लामाबाद सऊदी की रक्षा में सहयोग तो कर सकता है, लेकिन यमन की जमीन पर सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा है।
इजरायल से खुफिया मदद की उम्मीद
येरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड से दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता और हूती से निपटने के लिए खुफिया सहयोग दिलाने की अपील की है।
वहीं, इजरायल हयोम अखबार के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अन्य खाड़ी देशों और मिस्र से भी सहयोग मांगा है।
अमेरिका और ब्रिटेन भी हूती के खिलाफ सीधे सैन्य हमले से फिलहाल बच रहे हैं और खुफिया सहयोग तथा सैन्य सलाह तक सीमित रहने की नीति अपना रहे हैं।
गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से हूती ने लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया है। अब सऊदी अरब भी उसके हमलों की जद में है। ऐसे में रियाद के सामने मुश्किल यह है कि जिस इजरायल के साथ उसके औपचारिक संबंध नहीं हैं, उसी से सुरक्षा और खुफिया सहयोग की संभावनाएं तलाशनी पड़ रही हैं।
दैनिक जागरण