‘दुनिया को सनातन में ही मिलती है परम शांति’
पितृ पक्ष के दौरान हर साल भारत और विदेशों से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की याद में रस्में निभाने के लिए गया आते हैं। इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और लातविया से आए विदेशी श्रद्धालुओं ने गया में अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण की रस्में निभाईं।
08 अक्टूबर, 2026 – नई दिल्ली: पितृपक्ष के दौरान भारत समेत पूरी दुनिया से लोग बिहार के गया में पिंडदान करने पहुंच रहे हैं। हाल ही में रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और लातविया से आए विदेशी श्रद्धालुओं ने गया में अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण की रस्में निभाईं। दिलचस्प बात ये है कि रूस और यूक्रेन के नागरिक, जिनके देश 2022 से आपस में युद्ध कर रहे हैं, अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना करने और उनसे जुड़े अनुष्ठान करने के लिए गया में एक साथ आए। श्रद्धालुओं ने हिंदू परंपराओं का पालन करते हुए फल्गु नदी के किनारे देव घाट पर पवित्र रस्में निभाईं और अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की। रूस और यूक्रेन के श्रद्धालुओं का एक साथ शामिल होना इस पल को खास बनाता है, जो दिखाता है कि आस्था सीमाओं और संघर्षों से ऊपर हो सकती है।
पांच देशों के 22 श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान और तर्पण
- हाल ही में गया में फल्गु नदी के किनारे देव घाट पर पांच देशों के विदेशी श्रद्धालुओं के साथ मिलकर ‘पिंड दान’ और ‘तर्पण’ किया। इन अनुष्ठानों में पांच देशों के 22 विदेशी श्रद्धालुओं के एक समूह ने हिस्सा लिया। इनमें रूस से छह, जर्मनी से 11, यूक्रेन से दो और इटली व लातविया से एक-एक श्रद्धालु शामिल थे।
- उन्होंने पितृपक्ष के दौरान गया आए हजारों भारतीय तीर्थयात्रियों के साथ मिलकर ये अनुष्ठान किए। 10 अक्टूबर को पितृपक्ष मेला खत्म होने से पहले कुल 48 विदेशी श्रद्धालु (जिन्हें तीन समूहों में बांटा गया है, जिसमें शुक्रवार का समूह भी शामिल है) अपने पूर्वजों से जुड़े अनुष्ठान करेंगे।
- सोशल मीडिया एक्स पर एक यूजर्स भारत की सनातन परंपरा का गुणगान कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा-‘गया, बिहार: जर्मनी, घाना, यूक्रेन और रूस से आए श्रद्धालु पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र ‘पिंड दान’ की रस्म निभाते हैं। दुनिया को सनातन में ही परम शांति मिलती है।’
धर्मगुरु ने कहा-ये श्रद्धालु सनातन के सच्चे अनुयायी
- धर्मगुरु लोकनाथ गौड़ ने कहा, ‘रूस और यूक्रेन के जिन नागरिकों ने अनुष्ठान किए, वे एक ही विमान से आए थे। उनका दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध या किसी भी तरह की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। ये श्रद्धालु सनातन धर्म के सच्चे अनुयायी हैं।’
- यूरोपीय और अफ्रीकी देशों में सनातन धर्म का प्रचार करने वाले लोकनाथ गौड़ ने कहा, ‘अपने दिवंगत पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए फल्गु नदी के किनारे अनुष्ठान करने के बाद उन्होंने विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के पदचिह्नों के सामने प्रार्थना भी की।’
ये विदेशी श्रद्धालु पिछले ढाई साल से सनातन धर्म के नियमों और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन कर रहे थे। औपचारिक रूप से इस धर्म को अपनाने और पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनने के बाद, उन्हें गया जी जाने और पूर्वजों से जुड़े अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई।
धर्मगुरु लोकनाथ गौड़
दुखद घटनाओं के बाद सनातन धर्म की ओर मुड़े
धर्मगुरु लोकनाथ गौड़ ने बताया, ‘कुछ विदेशी श्रद्धालु अपने या अपने परिवार के सदस्यों के जीवन में व्यक्तिगत दुखद घटनाओं का अनुभव करने के बाद सनातन धर्म की ओर आए। अनुष्ठानों के लिए रूसी और यूक्रेनी श्रद्धालुओं का एक साथ आना गया की एक पुरानी घटना की याद दिलाता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वालों के लिए पिंडदान
- 2022 में, यूलिया नाम की एक यूक्रेनी महिला ने गया के एक मंदिर में उन सभी सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था, जिनकी मौत फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में हुई थी। रूस से आए जिन श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान किए, उनमें लारिसा ब्रिनेवा, ओल्गा राडी, एकातेरिना पावलोवा, ओक्साना बुरिवा, अल्बिना गिमतदिनोवा और नादेज्दा दुरसुनोवा शामिल थीं।
- जर्मनी से विक्टोरिया थुन, लिडिया श्वाब, नताली कोच, यूजीनिया मुलर, अन्ना सिरबू, इरीना मिसल राजस्नोवा, जाना कोचनेव अकुलोवा, फैना सिफत्सी, स्वेतलाना, नादेज्दा नेबेलिका ओमिगोव और क्रिस्टीना श्लेम शामिल थीं। ओलेक्जेंड्रा खोमेंको और नतालिया कुरिलोवा यूक्रेन से, मास्सिमो बोराची इटली से और ओलेसजा पुसिंस्का लातविया से थीं।
नवभारत टाइम्स