अल्बर्टा में आजादी की मांग, 19 को रेफरेंडम
कनाडा में एक साथ दो अलगाववाद का आंदोलन चल रहे हैं। पहला आंदोलन अल्बर्टा की आजादी का है, जिसके लिए 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह होगा। दूसरा आंदोलन खालिस्तान की मांग के लिए है। इसके लिए 18 अक्टूबर को कथित जनमत संग्रह का आयोजन किया जा रहा है।
09 अक्टूबर, 2026 – टोरंटो: भारत में खालिस्तान बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा अलगाववादी अभियान ने कनाडा में अलगाववाद की भावना को बढ़ा दिया है। कनाडा का अल्बर्टा प्रांत अपने देश की सरकार पर अधिक स्वायत्तता देने और भविष्य में आजादी के लिए मतदान कराने जा रहा है। अल्बर्टा के इस अलगाववादी अभियानों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी हासिल है। ये अलगाववादी राज्य में रेफरेंडम करने जा रहे हैं, ताकि कनाडा से आजादी को लेकर मुहिम को तेज किया जा सके।
19 अक्टूबर को अल्बर्टा में जनमत संग्रह
अल्बर्टा में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह होने वाला है। इस जनमत संग्रह में मतदाताओं से यह पूछा गया है कि क्या प्रांतीय सरकार को कनाडा से अलग होने के संबंध में भविष्य में बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने के लिए आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। यह प्रश्न स्वयं बाध्यकारी नहीं है और इससे अल्बर्टा स्वतंत्र नहीं हो जाएगा। बल्कि, इससे अल्बर्टा की स्वतंत्रता के आंदोलन को एक नई दिशा मिलेगी।
18 अक्टूबर को खालिस्तानी करेंगे ‘जनमत संग्रह’
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से जुड़ा अलगाववादी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) 18 अक्टूबर को एडमंटन में खालिस्तान जनमत संग्रह से संबंधित अपना कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसमें भारत में अलग खालिस्तान देश के गठन के लिए पन्नू के समर्थक वोट डालेंगे। यह पहली बार नहीं है, जब सिख फॉर जस्टिस खालिस्तान को लेकर ऐसा जनमत संग्रह आयोजित कर रहा है।
माहौल बनाने की कोशिश कर रहा पन्नू
भारत में घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू कनाडा में अल्बर्टा की आजादी को लेकर चलाई जा रही मुहिम में अपना एजेंडा सेट करने की तैयारी में है। वह अल्बर्टा के लिए आयोजित होने वाले जनमत संग्रह के ठीक एक दिन पहले खालिस्तान के लिए कथित जनमत संग्रह कराकर सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरना चाहता है, ताकि उसकी प्रासंगिकता बनी रहे। यह वह भी जानता है कि ऐसे जनमत संग्रह से कोई लाभ नहीं होने वाला है।
नवभारत टाइम्स