एजेंटों पर शिकंजा कसने की तैयारी
ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट हुए 15 भारतीयों, जिनमें 11 पंजाबी हैं, से पंजाब पुलिस अवैध ट्रैवल नेटवर्क और ‘डंकी रूट’ की परतों को खोलने के लिए पूछताछ कर रही है। जांच का उद्देश्य एजेंटों, यात्रा मार्गों और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का पता लगाना है, ताकि बड़े गिरोहों तक पहुंचा जा सके।
01 मई, 2026 – चंडीगढ़ : ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं के जरिये अब अवैध ट्रैवल नेटवर्क की परतें खोलने की तैयारी है। ऑस्ट्रेलिया से लौटे 15 भारतीयों में 11 पंजाब के हैं। इनसे पंजाब पुलिस सिलसिलेवार पूछताछ कर रही है।
जांच का फोकस इस बात पर है कि ये लोग किन एजेंटों के संपर्क में आए, किस रास्ते (रूट) से विदेश पहुंचे और इसमें किन-किन राज्यों या देशों की कड़ियां जुड़ी हैं। ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर लौटे लोगों में जसवंत सिंह (34), अंगेज सिंह (32), सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31), गुरप्रीत सिंह संधू (30), जगजीत सिंह (35), जसप्रीत सिंह (35), निर्मल सिंह (38), श्रुति शर्मा (35), रणजीत सिंह (35), हरप्रीत सिंह (41) और गगनदीप सिंह (25) शामिल हैं।
पुलिस इन सभी से अलग-अलग बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि एजेंटों के नाम, भुगतान के तरीके और यात्रा के हर पड़ाव की सटीक जानकारी जुटाई जा सके। जांच एजेंसियां खास तौर पर यह जानने में जुटी हैं कि क्या इन युवाओं ने ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया था।
किन देशों के जरिये ट्रांजिट हुआ और फर्जी दस्तावेज या वीजा का सहारा लिया गया या नहीं। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में एक ही नेटवर्क अलग-अलग नामों से काम करता है, इसलिए पूछताछ के आधार पर कड़ियां जोड़कर बड़े गिरोह तक पहुंचने की कोशिश है। बीते साल अमेरिकी ने 300 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया गया था, जिनमें से 126 से अधिक पंजाब के निवासी थे। ये लोग मुख्य रूप से ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका में दाखिल हुए थे।
पंजाब पुलिस ने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम का गठन किया था, जिसका नेतृत्व डीजीपी प्रवीण सिन्हा कर रहे थे। पंजाब पुलिस ने डिपोर्ट हुए लोगों के बयानों के आधार पर ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 15 से अधिक FIR दर्ज की थी। ये मामले मुख्य रूप से जालंधर, तरनतारन, मोगा और संगरूर सहित विभिन्न जिलों में दर्ज किए गए। इसके बाद अमृतसर और जालंधर प्रशासन ने फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 40 से अधिक ट्रैवल एजेंटों के लाइसेंस रद कर दिए थे।
पिछले तीन सालों में पंजाब में ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 3200 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने डिपोर्टेड लोगों को रिसीव करने और उनके मामलों की जांच कराने की बात कही थी।
दैनिक जागरण