लोगों का सवाल-क्या बदल रही हमारी सिटी
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी उसकी बनी हुई साख है। यह साख दशकों की मेहनत और से बनी है लेकिन इसे कमजोर होने में अधिक समय नहीं लगता इसलिए अब आवश्यकता केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने की नहीं बल्कि संगठित अपराध और भय के माहौल के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक रणनीति की है।
17 जून, 2026 – चण्डीगढ़-पंजाब : चंडीगढ़ को देश के सबसे खूबसूरत, सुरक्षित और व्यवस्थित शहरों में गिना जाता है लेकिन हाल के कुछ महीनों में हुई घटनाओं ने इस पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
व्यापारियों को मिल रही रंगदारी की धमकियां, गैंगस्टरों के नाम से जारी सोशल मीडिया संदेश और दो दिन पहले मेडिकल स्टोर के कैशियर की हत्या ने यह बहस तेज कर दी है कि आखिर शहर में कानून का डर बचा है या अपराधियों का खौफ बढ़ रहा है।
चिंता केवल एक घटना की नहीं है। पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो तस्वीर और गंभीर दिखाई देती है। सेक्टर-26 में हुई चर्चित हत्या, सेक्टर-9 में दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज हत्याकांड की घटना, सेक्टर 32 में रंगदारी को लेकर गोलियां चलाना, सेक्टर 21 में व्यापारी के घर पर फायरिंग और चंडीगढ़ स्थित पंजाब भाजपा मुख्यालय पर हुए हमले के साथ शहर के क्लबों पर बमबाजी ऐसे मामले हैं जिन्होंने समय समय पर शहर की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया। इन घटनाओं ने यह संदेश दिया कि अपराधी और असामाजिक तत्व केवल छिपकर नहीं बल्कि खुली चुनौती देने की मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं।
लोगों के मन में पैदा हो रहा डर
यही वजह है कि हाल की घटनाएं अब चंडीगढ़ के लोगों के मन में डर पैदा कर रही हैं। जब अपराधी खुलेआम धमकियां दें, व्यापारियों को निशाना बनाएं और वारदात के बाद भी भय का वातावरण बना रहे तब समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं रहती बल्कि वह शासन और प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी छा चुकी हैं वारदातें
यह पहली वारदात भी नहीं है जब चंडीगढ़ गैंगस्टर नेटवर्क की जद में आया हो। मिड्डूखेड़ा हत्याकांड से लेकर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सक्रिय गिरोहों की गतिविधियां राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनीं। जांच एजेंसियों ने कई मॉड्यूल भी तोड़े, गिरफ्तारियां भी हुईं लेकिन इसके बावजूद रंगदारी और धमकियों की घटनाएं थमी नहीं। अब यही स्थिति चंडीगढ़ जैसे सुव्यवस्थित शहर के लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
पुलिस के सामने चुनाैतियां
पुलिस के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कई अपराधी विदेशों में बैठे हैं। इंटरनेट कॉलिंग और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं और स्थानीय नेटवर्क के जरिये अपने खतरनाक इरादों को अंजाम दे रहे हैं लेकिन आम नागरिक तो पुलिस का इकबाल चाहता है। बेेखौफ काम करने का और व्यापार करने का भरोसा चाहता है। उसे यह भरोसा चाहिए कि कानून की पहुंच अपराधियों के गिरेबान तक हो। दरअसल, ऐसी घटनाएं लोगों में भय और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाती हैं।
चंडीगढ़ में बदहाल कानून व्यवस्था की तुलना आतंकवाद के दौर से तो नहीं की जा सकती लेकिन ऐसी घटनाओं से लोगों की बातचीत में उस दौर का जिक्र बढ़ना अपनेआप में चेतावनी है। किसी भी शहर में डर का माहौल अपराधियों की सबसे बड़ी सफलता और व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता माना जाता है जो अब चंडीगढ़ में किसी न किसी कोने में घर बना रहा है। प्रशासन और पुलिस को यह समझना होगा कि सुरक्षा केवल अपराध के आंकड़ों से नहीं मापी जाती। सुरक्षा का वास्तविक पैमाना लोगों का भरोसा होता है। यदि व्यापारी असुरक्षित महसूस करने लगें, परिवार चिंतित रहने लगें और शहर में अपराधियों की चर्चा कानून से ज्यादा होने लगे तो यह स्थिति गंभीर मानी जानी चाहिए।
आज चंडीगढ़ में पुलिस और प्रशासन का भरोसा सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है इसलिए आवश्यकता उस भरोसे को कायम करने की है।
अमर उजाला