खालिस्तानी आतंक और पाकिस्तान की ISI की साजिश का नया रूप
5 मई 2026 को पंजाब में जालंधर BSF मुख्यालय और गुरदासपुर खासा आर्मी छावनी के पास हुए दोहरे धमाकों का विश्लेषण। खालिस्तानी आतंक, ISI की साजिश, ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ और राज्य की सुरक्षा चुनौतियों पर गहन चर्चा।
12 मई, 2026 – पंजाब में 5 मई की देर शाम को दो धमाके हुए। पहला विस्फोट जालंधर में बीएसएफ के फ्रंटियर मुख्यालय के प्रवेश द्वार के पास रात करीब 8.00 बजे हुआ। लगभग तीन घंटे बाद, गुरदासपुर जिले में खासा आर्मी छावनी की चारदीवारी के पास एक दूसरा विस्फोट हुआ (अमृतसर जिले में नहीं, जैसा कि मीडिया में रिपोर्ट किया गया है)। मैंने अपने सैन्य करियर के दौरान जालंधर, अमृतसर और खासा में सेवा की है और मैं प्रत्येक क्षेत्र और वहां तैनात बलों से परिचित हूं। पंजाब में हाल के महीनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए हैं। लेकिन पंजाब में 5 मई को हुए दोहरे विस्फोटों ने राज्य और देश दोनों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी है।
शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दोनों विस्फोटों में स्पष्ट रूप से आतंकवादी संगठन के हस्ताक्षर हैं। यह सूचना भी मिली है कि यह खालिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन द्वारा की गई है। लक्ष्यों का चयन सावधानी से किया गया है, एक तरफ बीएसएफ को निशाना बनाया गया है और दूसरा विस्फोट सेना को टारगेट करता है। कम से कम एक विस्फोट दूरस्थ साधनों द्वारा किया गया है जो उच्च स्तर के तकनीकी परिष्कार का संकेत देता है। पंजाब में सुरक्षा प्रतिष्ठानों के पास हुए विस्फोटों से यह भी पता चलता है कि अब पंजाब में ओवर ग्राउंड वर्कर्स और खालिस्तानी मुद्दे से सहानुभूति रखने वालों का एक अच्छी तरह से स्थापित नेटवर्क सक्रिय है।
पंजाब में धमाकों का समय है दिलचस्प
पंजाब में हुए धमाकों का समय भी दिलचस्प है। पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से दो दिन पहले हुए दोहरे विस्फोटों में सेना और बीएसएफ दोनों को निशाना बनाया गया, जिन्होंने चार दिनों से भी कम समय में पाकिस्तान को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पंजाब की सीमा सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा की जाती है। पंजाब में यह सीमा पूरी तरह से बाड़ से घिरी हुई है। भारतीय सेना किसी भी युद्ध या संघर्ष की स्थिति में पंजाब की रक्षा करती है। इस सीमावर्ती राज्य की संवेदनशीलता को देखते हुए, सेना की अधिकांश संरचनाएं और इकाइयां अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के क्षेत्र में तैनात हैं। ऐसे में ये दोहरे धमाके पाकिस्तान की ओर से संदेश देने की कोशिश हो सकती है।
पाकिस्तान ने हमेशा पंजाब को उसके रणनीतिक महत्व के कारण निशाना बनाने का प्रयास किया है। भारत के साथ पारंपरिक युद्ध में, पंजाब सैन्य जीत हासिल करने का पाकिस्तान के लिए सबसे करीबी इलाका है। पाकिस्तान के साथ पारंपरिक युद्ध में भारत की भी यही सोच है। भारत के लिए भी, पाकिस्तानी प्रांत पंजाब एक तेज और महत्वपूर्ण जीत के लिए कई टारगेट प्रदान करता है। यही कारण है कि पाकिस्तान हमारे पंजाब राज्य को अस्थिर करने का प्रयास करता रहता है। पाकिस्तान जानता है कि वह पंजाब में पारंपरिक युद्ध में भारत को नहीं हरा सकता है। पाकिस्तान पर भारत की एक बड़ी सैन्य श्रेष्ठता है। पाकिस्तान के नापाक मंसूबे तभी कामयाब हो सकते हैं जब पंजाब कमजोर, अस्थिर और खंडित हो।
खालिस्तानियों के साथ मिलकर पंजाब को अस्थिर करती रही है ISI
पाकिस्तान की आईएसआई भारत और विदेशों में स्थित खालिस्तानी तत्वों के साथ मिलकर पंजाब को अस्थिर करने के लिए एक निरंतर गैर-पारंपरिक अभियान के पीछे रही है। आधुनिक युद्ध में, इसे ग्रे ज़ोन वारफेयर कहा जाता है जिसमें पारंपरिक शांति और खुले युद्ध के बीच आने वाले शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा आक्रामक कार्रवाई शामिल होती है। पंजाब के मामले में, आपराधिक नेटवर्क, नशीली दवाओं की तस्करी, ड्रोन घुसपैठ, दुष्प्रचार अभियान, विस्फोटों, हत्याओं और आतंकवादी कार्रवाइयों के माध्यम से अस्थिरता की तीव्रता बढ़ती हुई प्रतीत होती है। खालिस्तानी तत्वों ने हमारे बहादुर सिख सैनिकों की वफादारी को प्रभावित करने की कोशिश तो की है, लेकिन ये सभी प्रयास पूरी तरह से विफल रहे हैं।
पंजाब में एक सक्षम पुलिस और स्थानीय खुफिया तंत्र है। लेकिन जब राज्य का सत्तारूढ़ राजनीतिक नेतृत्व स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं देता है और उसमे रणनीतिक ज्ञान की कमी होती है, तो पुलिस खराब प्रदर्शन करती है। पंजाब में, हमने एक अनावश्यक राजनीतिक स्लगफेस्ट देखा है जो स्पष्ट रूप से राज्य के कार्यकारी नेतृत्व को सुरक्षा चिंताओं की गंभीरता से दूर करता है। इसके अलावा, विशेष रूप से पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में काफी हद तक नागरिक-सैन्य संलयन (Civil-Military fusion) की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से, इस तरह के संकुचित दृष्टिकोण से वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं क्योंकि सत्तारूढ़ व्यवस्था का ध्यान कहीं और होता है।
विस्फोटों पर राजनीति बेहद निंदनीय है। घटना के कुछ घंटों के भीतर पंजाब के सीएम का बयान इन धमाकों के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन को क्लीन चिट दे देता है। इस तरह की आतंकी कार्रवाई , चाहे कोई हताहत न भी हो, राज्य के सुरक्षा तंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। सौभाग्य से, डीजीपी पंजाब पुलिस ने विस्फोटों से आसन्न खतरे के बारे में एक समझदार दृष्टिकोण लिया है। एनआईए को इस आतंकी गतिविधि के अपराधियों की पहचान करने के लिए जल्द से जल्द बिंदुओं को जोड़ना चाहिए। पंजाब को अब रणनीतिक भटकाव पैदा करने, सीमा प्रबंधन को कमजोर करने और कानून और व्यवस्था मशीनरी को तोड़ने के पाकिस्तान के प्रयास को विफल करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के दौरान देश के बाकी हिस्सों को, विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और गुजरात को अधिक सतर्क रहना चाहिए।
पांचजन्य