सामने आई AAP में अंदरूनी हलचल
पंजाब में AAP सरकार ने राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा में कटौती की। पार्टी में भूमिका बदलने के बाद इस फैसले को सियासी संकेत माना जा रहा है, केंद्र सुरक्षा देने की चर्चा भी तेज।
20 अप्रैल, 2026 – नई दिल्ली : पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब राज्य की AAP सरकार ने अपने ही राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए उनकी जेड प्लस सुरक्षा में कटौती कर दी। बता दें कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्हें पंजाब सरकार की ओर से उच्च स्तरीय सुरक्षा दी गई थी, विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम राघव चड्ढा सुरक्षा और AAP की अंदरूनी राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।
दोहरी जिम्मेदारी के चलते मिला था विशेष सुरक्षा कवर
राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता और पंजाब में सह-प्रभारी की जिम्मेदारी निभाने के कारण विशेष सुरक्षा दी गई थी। उन्हें पंजाब पुलिस के जवानों के साथ-साथ कमांडो स्तर का सुरक्षा कवर भी उपलब्ध कराया गया था। उनकी भूमिका को देखते हुए यह व्यवस्था जेड प्लस सुरक्षा पंजाब के तहत सबसे उच्च श्रेणी में रखी गई थी। लेकिन अब AAP शासित पंजाब सरकार के इस फैसले को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। जिसके कई मायने निकले जा रहे हैं।
क्यों हटाई गई राघव चड्ढा की सुरक्षा
हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित किया कि अब चड्ढा को सदन में पार्टी की ओर से बोलने के लिए समय न दिया जाए। इस बदलाव के बाद सुरक्षा में कटौती को आप पार्टी अंदरूनी बदलाव और राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अब केंद्र सरकार देगी जेड प्लस सुरक्षा
वहीं सूत्रों की मने तो अब राघव चड्ढा को केंद्र सरकार की ओर से जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार आखिर राघव चड्ढा को इतनी उच्च स्तर की सुरक्षा क्यों दे रही है।
बढ़ सकती है सियासी खींचतान
बता दें कि राघव चड्ढा की सुरक्षा में बदलाव और पार्टी में उनकी भूमिका में कमी को लेकर राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं में तेजी आई हैं। वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह मुद्दा पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में और गहराई से उभर सकता है।
पांचजन्य