धोखा देकर निकाली जाती है किडनी
भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ती राजनयिक नजदीकियों के बीच एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है, जिसने दोनों देशों सहित पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर कर रख दिया है।
15 जून, 2026 – ढाका : भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ती राजनयिक नजदीकियों के बीच एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है, जिसने दोनों देशों सहित पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर कर रख दिया है।
चार मानव तस्करी नेटवर्क सक्रिय
खुफिया सूत्रों और सुरक्षा विश्लेषकों ने दावा किया है कि पाकिस्तान समर्थित संगठित नेटवर्क बांग्लादेश के गरीब और लाचार लोगों को निशाना बनाकर मानव अंगों की अवैध तस्करी कर रहा है। यह घिनौना खेल न केवल मानवता को शर्मसार कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।
रोजगार का झांसा और फिर धोखे से किडनी चोरी बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘ब्लिट्ज’ के संपादक सालाह उद्दीन शोएब चौधरी ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कम से कम चार मानव तस्करी नेटवर्क सक्रिय हैं।
ये नेटवर्क गरीब बांग्लादेशी नागरिकों को हर महीने करीब 750 अमेरिकी डॉलर (लगभग 62 हजार रुपये) वेतन वाली नौकरियों का लालच देते हैं।
जब ये मासूम लोग रोजगार की उम्मीद में लाहौर पहुंचते हैं, तो उन्हें ‘रूटीन मेडिकल चेकअप’ के नाम पर निजी क्लीनिकों में ले जाया जाता है। वहां उन्हें बेहोश करके धोखे से उनकी एक किडनी निकाल ली जाती है।
होश में आने पर जब पीड़ितों को इस धोखे का पता चलता है, तो उन्हें बंधक बना लिया जाता है। बांग्लादेश वापस भेजने से पहले उनसे जबरन ऐसे कागजातों पर दस्तखत कराए जाते हैं, जिनमें लिखा होता है कि उन्होंने अपनी मर्जी से अपने किसी रिश्तेदार को किडनी दान की है।
लाहौर पुलिस ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया
लाहौर पुलिस ने ऐसी ही एक फर्जी कंपनी ‘जाकिर ट्रेडर्स’ का भंडाफोड़ किया है। HIV फैलाने की खौफनाक साजिश इस रिपोर्ट में एक और बेहद परेशान करने वाला और संवेदनशील तथ्य सामने आया है।
खुफिया इनपुट्स के अनुसार, पाकिस्तानी आपराधिक नेटवर्क ISI के साथ मिलकर एक बेहद ‘खतरनाक और भयावह’ साजिश रच रहे हैं।
इसके तहत, पर्यटन या रोजगार के सिलसिले में पाकिस्तान आने वाले युवा बांग्लादेशी नागरिकों को मेडिकल टेस्ट और पैथोलाजिकल जांच के बहाने धोखे से HIV वायरस से संक्रमित किया जा रहा है।
साजिश के तहत इन संक्रमित युवाओं को वापस बांग्लादेश भेज दिया जाता है ताकि ग्रामीण इलाकों और समाज के विभिन्न हिस्सों में चुपचाप इस जानलेवा बीमारी को फैलाया जा सके।
हालांकि, इस दावे की अभी पूरी तरह से स्वतंत्र जांच और पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इस खबर ने मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है।
दैनिक जागरण