Pakistan Military Coup: शहबाज शरीफ की सरकार बिना बहुमत के बनी थी और अब एक साल से पूरी तरह बेबस नजर आ रही है। देश के सारे महत्वपूर्ण फैसले रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय) में लिए जाते हैं। असीम मुनीर के हाथों में उस वक्त सारी ताकत आ गई है जब पाकिस्तान एक साथ कई संकटों से जूझ रहा है।
08 अगस्त, 2026 – इस्लामाबाद:शहबाज शरीफ की सरकार बिना बहुमत के बनी थी और अब एक साल से पूरी तरह बेबस नजर आ रही है। देश के सारे महत्वपूर्ण फैसले रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय) में लिए जाते हैं। असीम मुनीर के हाथों में उस वक्त सारी ताकत आ गई है जब पाकिस्तान एक साथ कई संकटों से जूझ रहा है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने बहुत तेजी के साथ पाकिस्तानी शासन पर कंट्रोल जमाना शुरू कर दिया है। असीम मुनीर पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती आबादी को काबू करने के लिए एक नये प्लान पर काम कर रहे हैं। जबकि वो पाकिस्तान की मॉनसून से निपटने की समस्याओं पर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले दिनों उन्होंने पाकिस्तान की रणनीतिक न्यूक्लियर कमांड को अपने अंदर ले लिया था और अब वो तीन सेनाओं के असली प्रमुख भी हैं। यानि असीम मुनीर ही पाकिस्तान के असली शासकों की तरह काम कर रहे हैं तो सवाल ये उठने लगे हैं कि फिर वो हाईब्रिड शासन क्यों चलाएं?
पाकिस्तान में इस वक्त हाईब्रिड मॉडल पर सत्ता चल रहा है जिसमें शहबाज शरीफ असीम मुनीर के साथ मिलकर शासन चला रहा है। पाकिस्तान के हाइब्रिड शासन के प्रमुख और देश के सबसे ताकतवर व्यक्ति असीम मुनीर ने बहुत तेजी से कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। लेकिन अभ वो दूसरी जिम्मेदारियां भी संभालने जा रहे हैं और ये संकेत उनके सबसे करीबी और पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी के बयानों से मिलता है। पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का मानना है कि देश में मॉर्शल लॉ यानि तख्तापलट कभी भी हो सकता है।
पाकिस्तान में बेबस शहबाज शरीफ की सरकार
शहबाज शरीफ की सरकार बिना बहुमत के बनी थी और अब एक साल से पूरी तरह बेबस नजर आ रही है। देश के सारे महत्वपूर्ण फैसले रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय) में लिए जाते हैं। असीम मुनीर के हाथों में उस वक्त सारी ताकत आ गई है जब पाकिस्तान एक साथ कई संकटों से जूझ रहा है। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विद्रोह भड़का हुआ है। अस्थिरता और बिगड़ते प्रशासन के कारण PoK में भी लोग बगावत पर उतर आए हैं और सेना की हिंसक कार्रवाई को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रेस पर रोक लगा दी गई है।
यही वजह है कि पाकस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी सार्वजनिक तौर पर कहते हैं कि ‘सिस्टम ध्वस्त’ हो चुका है। अगर एक देश का गृहमंत्री ऐसा कहे तो पूरी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन पाकिस्तान के गृहमंत्री अगर ऐसा कहते हैं तो इसका मतलब है कि ‘सरकार अब गिने चुने दिनों के लिए ही है और ध्वस्त सिस्टम को संभालने की जिम्मेदारी कोई और अपने हाथों में लेना वाला है।’
पाकिस्तान में बार बार लगता रहा है सैन्य शासन
1947 के बाद से पाकिस्तान में चार बार सेना ने सत्ता पर कब्जा किया है। 1958, 1977 और 1999 में तख्तापलट के जरिए तीन चुनी हुई नागरिक सरकारों को हटाया गया। 1969 में याह्या खान ने साथी सैन्य शासक अयूब खान की जगह ली। पाकिस्तान सेना के पूर्व बागी और अब यूट्यूबर बने सैन्य अधिकारी आदिल रजा ने दावा किया कि सेना ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। एक यूट्यूब वीडियो में उन्होंने कहा कि मुनीर राष्ट्रपति बन सकते हैं और नकवी प्रधानमंत्री जबकि ‘लोकतांत्रिक दिखावा’ बना रहेगा।
मोहसिन नकवी का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
कभी सीएनएन के पत्रकार रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को मुनीर के सबसे करीबी लोगों में से एक माना जाता है। बिना किसी राजनीतिक अनुभव के भी पावर ब्रोकर के तौर पर काफी रसूख रखने वाले नकवी राजनीति में तब आए जब उन्हें सीनेट (भारत की राज्यसभा जैसा) के रास्ते शहबाज शरीफ की कैबिनेट में शामिल किया गया। इसलिए वह कोई आम कैबिनेट मंत्री नहीं हैं। वह ‘किंग्स मैन’ यानि खास आदमी हैं। नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख भी हैं जो मुनीर और शरीफ के बाद शायद देश का सबसे ताकतवर पद है।
गृह मंत्री मोहसिन नकवी पर तंज कसते हुए JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा ‘नकवी साहब हमारे बेटे जैसे हैं लेकिन समय से पहले ही बड़े हो गए हैं।’ यह टिप्पणी नकवी की उस चेतावनी के कुछ हफ्ते बाद आई जिसमें उन्होंने सेना और सत्ता प्रतिष्ठान से कहा था कि ‘वर्दी उतारें और राजनीति में आएं।’
क्या असीम मुनीर तख्तापलट की तैयारी कर रहे हैं?
यह पक्के तौर पर कहना मुश्किल है कि क्या असीम मुनीर सच में पाकिस्तान को एक और तख्तापलट की ओर ले जा रहे हैं। लेकिन कई एक्सपर्ट्स और पाकिस्तानी जानकारों का मानना है कि हाल की घटनाओं पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि ये सीधे मिलिट्री शासन में बदल सकती हैं।
भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल सीएम सेठ ने नकवी की बातों का मतलब यह निकाला कि बड़े राजनीतिक बदलाव हो सकते हैं। रिटायर्ड भारतीय सेना अधिकारी मेजर जनरल सेठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नकवी की बातें ‘पाकिस्तान में होने वाली घटनाओं का संकेत’ हैं और ‘इस बात की संभावना है कि मुनीर देश की कमान संभाल लेंगे और मार्शल लॉ लागू कर देंगे।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका अपना आकलन है।
नवभारत टाइम्स