पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ व्यवस्थित भेदभाव, धार्मिक स्वतंत्रता का ना होना और सम्मान को चोट किए जाने पर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। इससे पता चलता है कि सीमापार कैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किल जगह बनी हुई है।
30 अक्टूबर, 2026 – इस्लामाबाद: ब्रिटिश हिंदू एडवोकेसी ग्रुप इनसाइट यूके (INSIGHT UK) ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर रिपोर्ट दी है। बुधवार, 28 अक्टूबर को ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश हिंदूज के सामने पेश की गई रिपोर्ट में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, खासतौर से हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदुओं के सुनियोजित उत्पीड़न का दावा किया गया है। इसमें संपत्ति छीनने, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन से सांप्रदायिक हिंसा तक शामिल है। रिपोर्ट पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी घटने पर भी फिक्र जाहिर करती है।
इनसाइट यूके के मुताबिक, पाकिस्तान बनने के बाद से यानी 1947 से ही देश में हिंदुओं को भेदभाव, मंदिरों पर हमले और जान-माल पर खतरों का सामना करना पड़ा है। भारत के बंटवारे से पहले आज के पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 14 फीसदी (1941 की जनगणना में) से ज्यादा थी। मौजूदा समय में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 2 प्रतिशत से भी कम है।
- INSIGHT UK ने पाकिस्तान में हिंदुओं का धार्मिक उत्पीड़न शीर्षक से अपनी रिपोर्ट जारी की है।
- ये रिपोर्ट ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बनी ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के समक्ष पेश की गई है।
- पाकिस्तान में हर साल हिंदू और ईसाई समुदायों की 1,000 लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है।
- पाकिस्तान में हिंदू और इसाई महिलाओं को जबरन इस्लाम कबूल कराकर उनकी शादी की जा रही है ।
- रिपोर्ट में साक्ष्यों, पीड़ितों की गवाहियों और जमीनी वास्तविकताओं को सीधे संसद के सामने रखा गया है।
- पाकिस्तान में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता बचाने पर रिपोर्ट में जोर है।
गवाहों के आधार पर बनी है रिपोर्ट
INSIGHT UK ने दावा किया है कि रिपोर्ट पाकिस्तान में हिंदू समुदायों के खिलाफ होने वाले भेदभाव, धार्मिक स्वतंत्रता और उनके सम्मान के लिए पैदा हुए खतरों से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों और वर्तमान गवाहियों को साथ लाती है। रिपोर्ट में हर साल हिंदू और ईसाई समुदायों की 1,000 लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और अपहरणकर्ताओं के साथ शादी की बात है।
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में बार-बार पाकिस्तान में इस पैटर्न का जिक्र किया गया है, जिसका सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक समुदायों की युवा महिलाओं पर पड़ता है। यह रिपोर्ट पेश इस लिहाज से अहम है क्योंकि जरिए साक्ष्यों, पीड़ितों की गवाहियों और जमीनी वास्तविकताओं को सीधे संसद के सामने रखा गया है।
धार्मिक स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है। पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके अपने निर्णय लेने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
इस्लामाबाद में मंदिर ही नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि कि इस्लामाबाद में एक भी हिंदू मंदिर नहीं है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए मंदिर बनाने की योजना थी, जिसे आधिकारिक अनुमति मिलने के बावजूद 2020 में इस्लामी समूहों के हिंसक विरोध के कारण रोक दिया गया। ऐसे में यह मंदिर नहीं बन पाया है, जो अल्पसंख्यकों की कमजोर स्थिति को समझने के लिए एक अच्छा उदाहरण है। यह रिपोर्ट यूके सरकार के सामने पांच तत्काल मांगें रखती है।
- यूके-पाकिस्तान के बीच होने वाली हर बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को एक अनिवार्य शर्त बनाना।
- 2. मंदिरों की सुरक्षा के लिए समयबद्ध कदम उठाना और मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना।
3. पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार से जोड़ना और अल्पसंख्यक अधिकार समूहों के लिए अलग से फंड सुरक्षित रखना। - इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के लिए दो पद आरक्षित करना ताकि हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं की रिपोर्ट सामने आ सके।
- अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर हर छह महीने में आधिकारिक रिपोर्ट प्रकाशित करना। साथ ही जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय पाने के रास्ते तैयार करना।
नवभारत टाइम्स