500 फैक्ट्रियों पर ताले, मजदूर काट रहे बवाल, तारिक रहमान नाकाम!
Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन की वजह से 529 गारमेंट फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा है। देश के दर्जनों शहर में हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मजदूर न्यूनतम वेतन में इजाफे की मांग कर रहे हैं। वहीं IMF और विश्वबैंक ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
05 नवंबर, 2026 – ढाका: बांग्लादेश में दो साल पहले छात्रों ने आंदोलन कर शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया। उस वक्त देश की अर्थव्यवस्था अच्छा कर रही थी और लोगों के पास रोजगार थे। फिर छात्रों ने एक नया बांग्लादेश बनाने की ठानी और भयानक हिंसा, लूटपाट और अराजकता मचाकर प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश से भगा दिया। फिर मोहम्मद यूनुस आए, देश को लोगों को शब्जबाग दिखाए और उनके बाद देश में तारिक रहमान की सरकार बनी। लेकिन इन दो-ढाई वर्षों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ऐसी हो चुकी है कि 10 लाख से ज्यादा कपड़ा मजदूर अब सड़क पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को लेकर मौजूदा हालात क्या हैं?
- बांग्लादेश में 529 गारमेंट्स फैक्ट्रियां बंद हैं और 10 लाख से ज्यादा मजदूरों में भयानक असंतोष है। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने ये जानकारी दी है।
- सड़कों पर हजारों की संख्या में मजदूर उतर आए हैं और वेतन की मांग कर रहे हैं। कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो चुका है। ढाका, गाजीपुर और आशुलीया जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।
- देश में महंगाई दर में भयानक इजाफा हुआ है। मजदूर अपनी मासिक आय 12, 500 टका से बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने आनन फानन में एक ‘वेतन बोर्ड’ का गठन किया है।
- गारमेंट फैक्ट्रियां बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं और देश के कुल निर्यात में इसका योगदान 80 प्रतिशत से ज्यादा है।
- IMF ने बांग्लादेश के विकास का जो अनुमान लगाया है वो पिछले 40 वर्षों में सबसे कम है। देश के विकास दर का अनुमान 2.2 प्रतिशत से 3.6 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
बांग्लादेश में हालात कितने बिगड़ चुके हैं?
बांग्लादेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में 500 से ज्यादा रेडीमेड गामेंट फैक्ट्रियां बंद हैं। सैकड़ों और फैक्ट्रियों के हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं। ढाका, गाजीपुर और सावर क्षेत्रों में पुलिस और मजदूरों के बीच हिंसक झड़प हो रही हैं। सड़कों पर आगजनी की जा रही है। हिंसक झड़प से प्रमुख राजमार्गों पर आवाजाही बंद हो गई है और फैक्ट्रियों के कामकाज रूक गये हैं। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने पुलिस चौकियों, पुलिस वाहन, दमकल विभाग के वाहन, जूट का गोदाम और एक बैंक को फूंक दिया है।
गाजीपुर और मयमनसिंह सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं जहां 276 फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा सावर, अशुलिया और जिराबो में 185 फैक्ट्रियों का कामकाज रोक दिया गया है। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अंतर्गत आने वाले इलाकों में भी 68 फैक्ट्रियां बंद हैं।
तारिक रहमान की सरकार ने रविवार को गारमेंट कर्मचारियों के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया है लेकिन प्रदर्शन अभी भी जारी है। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस लाठी भांज रही है, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गये हैं, पानी के फव्वारे छोड़े जा रहे हैं और साउंड ग्रेनेड भी पुलिस ने फेंके हैं। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए प्रभावित औद्योगिक क्षेत्रों में ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ की पांच प्लाटून तैनात किए गये हैं।
बांग्लादेश की गारमेंड इंडस्ट्री क्यों ढह गई?
- हिंसक प्रदर्शन के बीच गारमेंट निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि अगर वेतन बोर्ड के गठन के बावजूद हिंसा और अव्यवस्था जारी रहती है तो उन्हें अपनी फैक्ट्रियां बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
- IMF और वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था बहुत खराब हालत में पहुंच चुकी है। देश में बैंकिंग संकट, ईंधन की भारी कमी और भयंकर महंगाई है।
- विकास दर 3.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है जो पिछले 40 वर्षों में सबसे कम है। निजी क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ घट गई है और विदेशी निवेश (FDI) की गति रुक सी गई है।
बांग्लादेश मजदूर एसोसिएशन BGMEA के अध्यक्ष महमूद हसन खान ने रविवार को ढाका स्थित एसोसिएशन परिसर में गारमेंट निर्माताओं के साथ एक आपातकालीन बैठक की है। इस बैठक में चल रहे मजदूर असंतोष पर चर्चा की गई जिसके बाद उन्होंने एक चेतावनी जारी की। उन्होंने मजदूर संगठनों और महासंघों से जिम्मेदारी से काम करने और मजदूरों के आंदोलन को नियंत्रित करने में मदद करने की अपील की। उन्होंने गृह मंत्री से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून लागू किया जाएगा चाहे वह मजदूर हो या फैक्ट्री मालिक।
नवभारत टाइम्स