03 जुलाई, 2026 – तीन दिवसीय भारत दौरे पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ताकाइची को ‘छोटी बहन’ बताते हुए उनका स्वागत किया और उन्हें दूरदर्शी व लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच आपसी विश्वास दोनों देशों की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है और यही साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
भारत-जापान की साझेदारी में विश्वास सबसे बड़ी ताकत : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आप जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और एक दूरदर्शी तथा लोकप्रिय नेता भी हैं। आप जापान के नारा प्रीफेक्चर से आती हैं, जो भारत-जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।” उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा, “कुछ ही दिन पहले जी7 शिखर सम्मेलन में मैंने कहा था कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के दौर में आपसी विश्वास हमारी सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है। मुझे गर्व है कि भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। पिछले कई दशकों में ऑटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक जापान भारत की विकास यात्रा का अहम भागीदार रहा है। प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा से हमारी स्पेशल स्ट्रेटजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप के नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।”
इंडो-पैसिफिक में शांति और समृद्धि पर जोर
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं तथा स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। त्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों देश मिलकर पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देंगे।
एआई और टेक्नोलॉजी साझेदारी बनेगी सहयोग का प्रमुख आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान की टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप भविष्य में सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी। उन्होंने बताया कि एआई के क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया है और भारतीय एआई इकोसिस्टम के कई प्रमुख संस्थानों ने अपने जापानी साझेदारों के साथ समझौते किए हैं। उन्होंने कहा, “जापान की प्रीसिजन टेक्नोलॉजी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा।”
रक्षा सहयोग में नया अध्याय
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत और जापान के पहले को-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर समझौता हुआ है। उन्होंने बताया कि नेवल रेडियो एंटीना परियोजना दोनों देशों की रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में नया अध्याय खोलेगी। साथ ही भविष्य में दोनों देश क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने वाली रक्षा तकनीकों का संयुक्त विकास करेंगे।
स्वास्थ्य और निवेश सहयोग को भी मिलेगी मजबूती
पीएम मोदी ने कहा कि फार्मा, मेडिकल उपकरण और बायोटेक क्षेत्र में हुए समझौते वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता और जापान की गुणवत्ता को जोड़कर दुनिया को किफायती, विश्वसनीय और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए कारोबारी समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 बिलियन डॉलर से अधिक का जापानी निवेश आएगा। साथ ही वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच हुए समझौते से पूंजी निवेश को और गति मिलेगी।
10 ट्रिलियन येन निवेश का रखा लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश और भारत में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में लगातार हो रहे सुधारों से कारोबार करना आसान हुआ है और जापानी कंपनियां इसका लाभ उठा सकती हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक सुरक्षा के संयुक्त रोडमैप के तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।
ऊर्जा और हरित विकास में बढ़ेगा सहयोग
पीएम मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत भारत में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे गोवर्धन पहल को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि बैटरी टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक भविष्य को नई दिशा देगा।
मोबिलिटी, शिक्षा और जनसंपर्क पर भी रहेगा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-जापान नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सफलता को शिपबिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश टैलेंट मोबिलिटी, स्किलिंग, टेक्निकल इंटर्नशिप, रिसर्च, शिक्षा और स्टार्टअप सहयोग को भी मजबूत कर रहे हैं। अगले वर्ष भारत और जापान अपने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे, जिसके तहत पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अटूट विश्वास पर टिकी है साझेदारी
पीएम मोदी ने कहा, “भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक तकनीक तक हमारी सोच और दृष्टिकोण में समानता है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। मुझे विश्वास है कि हमारी यह विशेष साझेदारी विकसित भारत के संकल्प, सशक्त जापान के विजन और वैश्विक प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।”
डीडी न्यूज