Sikh Extremists Asylum: देश से निकाले जाने (डिपोर्टेशन) के आंकड़ों से पता चलता है कि कनाडा से निकाले जाने वाले लोगों में भारतीय नागरिक लगातार सबसे आगे रहे हैं। साल 2023 में 1,132 भारतीयों को निकाला गया था जिनकी संख्या 2024 में बढ़कर 2,004 और 2025 में 3,779 हो गई।
02 जुलाई, 2026 – ओटावा/वेलिंगटन: न्यूजीलैंड और कनाडा में शरण लेने वाले भारतीयों की अर्जियां दनादन खारिज किए जा रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारी बड़ी संख्या में अर्जियां इसलिए ठुकरा रहे हैं क्योंकि उन्हें कई अर्जियां ‘झूठी मनगढ़ंत किसी खास मकसद से प्रेरित या उत्पीड़न के भरोसेमंद सबूतों के बिना’ मिली हैं। अर्जी खारिज होने के मामलों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आव्रजन अधिकारियों ने भारत से आए शरण आवेदनों, खासकर धार्मिक उत्पीड़न का हवाला देने वाले आवेदनों की जांच-पड़ताल तेज कर दी है।
सख्त जांच-पड़ताल ने एजेंट्स और कंसल्टेंट्स के उस फलते-फूलते नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है जो आवेदकों से उत्पीड़न का दावा गढ़ने और उनके माइग्रेशन में मदद करने के लिए मोटी रकम वसूलते थे।
कनाडा और न्यूजीलैंड में ‘शरण’ लेने वालों को झटका
कनाडा और न्यूजीलैंड में उस चरमपंथी नेटवर्क को भी झटका लगा है जो कथित तौर पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को शरण और बाद में नागरिकता दिलाने के बहाने इन देशों में भेजते थे। लेकिन अधिकारी अब ऐसे आवेदनों पर विचार करने से इनकार कर रहे हैं।
न्यूजीलैंड में कितने लोगों के आवेदन हुए खारिज?
- दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूजीलैंड में 2023-2024 (1 जुलाई से 30 जून) के दौरान भारतीय नागरिकों ने शरणार्थी या संरक्षित व्यक्ति का दर्जा पाने के लिए 1,169 दावे दायर किए। इसी अवधि में 199 दावों पर फैसला हुआ जिनमें से सिर्फ तीन मंजूर किए गए 116 खारिज कर दिए गए (58 प्रतिशत) और 80 वापस ले लिए गए।
- इसी तरह 2024-2025 की समान अवधि में भारतीय नागरिकों ने 887 दावे दायर किए जिनमें से 378 पर फैसला हुआ। इनमें से सिर्फ तीन मंजूर हुए 246 खारिज कर दिए गए (65 प्रतिशत) और 129 वापस ले लिए गए।
- साल 2025-2026 (1 जुलाई से 30 अप्रैल) के दौरान 550 दावे किए गए। इसी अवधि में 555 दावों पर फैसला लिया गया जिनमें से सिर्फ आठ मंजूर हुए, 348 नामंजूर (63 प्रतिशत) हुए और 199 वापस ले लिए गए।
कनाडा में भी फर्जी आवेजन धड़ाधड़ हो रहे खारिज
- कनाडा में भी भारतीयों की कई शरण की अर्जियां इसलिए खारिज की जा रही हैं क्योंकि अधिकारी यह मानते हैं कि आवेदक अपना पक्ष साबित करने में नाकाम रहे।
- 2023 में शरण के लिए किए गए 5,024 दावों पर फैसला हुआ। इनमें से 2,500 स्वीकार किए गए जबकि 2,051 (41 प्रतिशत) खारिज कर दिए गए, 220 छोड़ दिए गए और 253 वापस ले लिए गए।
- 2024 में अधिकारियों ने 5,994 दावों पर फैसला किया। इनमें से 2,175 स्वीकार किए गए, 1,688 खारिज किए गए (28 प्रतिशत), 1,377 छोड़ दिए गए और 754 वापस ले लिए गए।
- 2025 में तय किए गए 9,252 दावों में से 2,040 स्वीकार किए गए 2,309 खारिज किए गए, 3,914 छोड़ दिए गए और 989 वापस ले लिए गए।
- 2026 में 31 मार्च तक 2,866 दावों पर फैसला हुआ। इनमें से 443 स्वीकार किए गए, 688 खारिज किए गए, 1,406 छोड़ दिए गए और 329 वापस ले लिए गए।
देश से निकाले जाने (डिपोर्टेशन) के आंकड़ों से पता चलता है कि कनाडा से निकाले जाने वाले लोगों में भारतीय नागरिक लगातार सबसे आगे रहे हैं। साल 2023 में 1,132 भारतीयों को निकाला गया था जिनकी संख्या 2024 में बढ़कर 2,004 और 2025 में 3,779 हो गई। मार्च 2026 तक 1,712 भारतीय नागरिकों को देश से निकाला जा चुका था। आंकड़ों के मुताबिक कनाडा से निकाले जाने वाले लोगों की पेंडिंग लिस्ट में भी भारत सबसे ऊपर है जिसके 6,980 मामले चल रहे हैं; इसके बाद मेक्सिको का नंबर आता है, जिसके 5,311 मामले हैं।
नवभारत टाइम्स