जिन्ना और मुस्लिम लीग के धोखे की कहानी
बलूचिस्तान को भारत से पहले ही ब्रिटेन के औपनिवेशिक शासन से आजादी मिल गई थी। आजाद रियासत के तौर पर मान्यता भी मिली, लेकिन कलात के खान का मोहम्मद अली जिन्ना पर भरोसा करना उनके देश के लिए महंगा साबित हुआ।

बलूचिस्तान के राष्ट्रवादी समूहों ने आज 11 अगस्त को आजादी दिवस मनाने का ऐलान किया है। इसकी घोषणा खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान कहने वाले एक बलोच समूह ने हाल ही में की है। समूह ने इस मौके पर एक बधाई संदेश जारी किया है और दुनिया भर में बलोच लोगों से मनाने की अपील की है। रिपोर्ट बताती हैं कि पाकिस्तानी सेना की सख्ती के बावजूद बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर लोग अलग-अलग तरीकों से इसे मना रहे हैं। इस घटनाक्रम ने बलूचिस्तान के आजादी आंदोलन और पाकिस्तान के साथ उसके लंबे विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
पाकिस्तान बनने के पहले ही शुरू हुई कहानी
बलूचिस्तान के लोग लंबे समय से पाकिस्तान से अलग होने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। इसकी शुरुआत 1947 में पाकिस्तान बनने के साथ ही हो गई थी। वैसे इसकी कहानी पाकिस्तान बनने के तीन दिन पहले ही शुरू हो गई थी। वो तारीख थी 11 अगस्त 1947, जब कलात रियासत ने ब्रिटिश शासन से आजादी की घोषणा कर दी। बलूचिस्तान को जो वर्तमान इलाका है, उसमें कलात, खरान, लास बेला और मकरान जैसी कई राजनीतिक इकाइयां शामिल थीं।
जिन्ना के प्रभाव में आकर खरान, लास बेला और मकरान ने पाकिस्तान के साथ विलय स्वीकार किया लेकिन कलात की स्थिति अलग थी। 1876 की संधि ने कलात को ब्रिटिश दखल से अलग आंतरिक स्वायत्तता दी थी। इसलिए कलात पर भारत या पाकिस्तान में से किसी में भी शामिल होने की बाध्यता नहीं थी। इसलिए कलात के आखिरी खान मीर अहमद यार खान ने आजादी का विकल्प चुना।
पाकिस्तान का क्या है कहना?
हालांकि, पाकिस्तान का कहना है कि कलात के खान ने शुरू में स्वतंत्रता की मांग की थी लेकिन 27 मार्च 1948 को उन्होंने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करके कलात को पाकिस्तान में शामिल कर लिया। पाकिस्तान का कहना है कि बातचीत के बाद ऐसा किया गया। वहीं, बलोच राष्ट्रवादियों का कहना है कि यह विलय लोगों की असली इच्छा से नहीं था। वे इस विलय को जबरदस्ती कब्जा मानते हैं। इस विलय का उस समय भी विरोध हुआ था और यह खान के परिवार के अंदर से शुरू हुआ था। उसी साल प्रिंस अब्दुल करीम ने सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया।
जिन्ना ने दिया कलात के खान को धोखा
1946 में कलात के खान ने मोहम्मद अली जिन्ना को अपना कानूनी सलाहकार नियुक्त किया। इसका मकसद ब्रिटिश क्राउन के सामने अपना पक्ष रखना था, लेकिन अंत में यह उनके लिए महंगा साबित हुआ। 4 अगस्त को दिल्ली में एक बैठक हुई, जिसमें भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन, कलात के खान, कलात के मुख्यमंत्री, मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। इस बैठक में जिन्ना ने कलात की आजादी का समर्थन किया। यह तय हुआ कि कलात 5 अगस्त से आजाद रहेगा।
11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें कलात को आजाद रियासत के तौर पर मान्यता दी गई। जिन्ना ने वादा किया कि मुस्लिम लीग बलूचिस्तान की आजादी का सम्मान करेगी। 15 अगस्त को जब भारत को आजादी मिली, उसी दिन कलात ने भी आजादी की घोषणा की। एक आजाद शासक के रूप में कलात के खान के नाम पर खुतबा पढ़ा गया।
बलूचिस्तान पर जिन्ना की चाल
खान को उम्मीद थी कि मुस्लिम लीग का वादा निभाया जाएगा, लेकिन जिन्ना के मन में दूसरी चाल थी। जिन्ना ने खान के साथ मुलाकातों में बलूचिस्तान के विलय को लेकर दबाव बनाना शुरू किया। खान ने जिन्ना की मांग ठुकरा दी और कहा कि बलूचिस्तान कबीलों की जमीन है और मैं वहां के लोगों से सलाह-मशविरा के बिना फैसला नहीं ले सकता।
पाकिस्तान में विलय का विरोध
जिन्ना के प्रस्ताव पर कलात के खान ने विधानसभा की बैठक बुलाई। इस बैठक में दोनों सदनों ने विलय के प्रस्ताव का एकमत से विरोध किया। इस बीच पाकिस्तान ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। खान ने गंभीरता को समझते हुए अपने कमांडर इन चीफ को सेना को फिर से संगठित करने और हथियार व गोला-बारूद का इंतजाम करने का निर्देश दिया।
पाकिस्तानी सेना की एंट्री
इस बीच जिन्ना ने 18 मार्च 1948 को खरान, लास बेला और मकरान को अलग करने की घोषणा कर दी। कलात अलग-थलग पड़ गया। जिन्ना ने कई बलोच सरदारों को भी मिला लिया था, जिससे खान बेबस हो गए। खान ने भारत और अफगानिस्तान से भी मदद मांगी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 26 मार्च को पाकिस्तानी सेना बलूच इलाकों में दाखिल हो गई। खान के पास जिन्ना की शर्तों को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उसी दिन उन्होंने पाकिस्तान में विलय की घोषणा कर दी। 27 मार्च को विलय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। इस तरह आजादी के छोटे से दौर के बाद कलात पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।
विवेक सिंह
नवभारत टाइम्स ऑनलाइन, प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर