ड्रग तस्करों और आतंकियों को कौन पहुंचा रहा फायदा?
21 जुलाई, 2026 – नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल ऑफिस ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत 16 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई पठानकोट जिले के भटियन गांव (गोल पंचायत) में शामलात जमीन पर रेत की अवैध माइनिंग के मामले में की गई है। आरोप है कि तत्कालीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर कुलदीप सिंह के एक विवादित आदेश के ज़रिए इस ज़मीन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया था। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अवैध माइनिंग के जरिए ड्रग तस्करों और आतंकियों को फायदा पहुंचाने के इस केस में कई लोग शामिल हैं। छापेमारी के दौरान, रेत और नदी के तल की सामग्री की अवैध माइनिंग से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। 1.75 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई। साथ ही, 91,34,322 रुपये बैलेंस वाले बैंक खातों को फ़्रीज करने का आदेश जारी किया गया।
ईडी ने यह जांच अमृतसर के विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। यह FIR कुलदीप सिंह और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ पठानकोट जिले की गोल पंचायत के भटियान गांव में मौजूद गांव की साझा जमीन (शामलात) को निजी व्यक्तियों को गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर करने के मामले में दर्ज की गई थी। रावी नदी के किनारे स्थित यह जमीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास है। कुलदीप सिंह को पठानकोट में एडीसी (ग्रामीण विकास) के पद पर राज्य सरकार के एक मंत्री की सिफारिश पर उनके रिटायरमेंट से चार दिन पहले नियुक्त किया गया था। उन्होंने सरकारी सेवा से रिटायर होने से एक दिन पहले ही यह आदेश जारी किया था।
जांच में यह भी पता चला है कि इलाके में रात के समय धड़ल्ले से ट्रक/टिपर/एक्सकेवेटर चल रहे थे, जिनमें से कुछ पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जो एक संगठित गैर-कानूनी माइनिंग ऑपरेशन की ओर इशारा करता है। पठानकोट और गुरदासपुर के सीमावर्ती इलाकों में माइनिंग (खनन) के मुद्दे से जुड़ी एक जनहित याचिका (CWP-22567-2012) भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, यह स्पष्ट है कि पठानकोट और गुरदासपुर जिलों के सीमावर्ती इलाकों में, खासकर रावी नदी के पार माइनिंग करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक है।
ऐसी किसी भी गतिविधि से ड्रग तस्करों, आतंकवादियों और देश-विरोधी तत्वों को मदद मिलती है जो आईएसआई द्वारा पाले-पोसे और नियंत्रित किए जाते हैं। वे देश के अंदरूनी इलाकों में सक्रिय हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को इसे नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का निर्देश भी दिया था, लेकिन ऐसा लगता है कि यह गतिविधि बिना रुके जारी है। इ्रडी ने उस ज़मीन पर हो रही कथित अवैध माइनिंग गतिविधियों की वैज्ञानिक जांच के लिए ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ से भी मदद मांगी है।
अमर उजाला