रक्षा बजट 18 फीसदी बढ़ा, विकास कार्यों में कटौती
Pakistan Army Budget: पाकिस्तानी सेना ने भारत और अफगानिस्तान के साथ तनाव और ऑपरेशनल जरूरतों का हवाला देते हुए रक्षा बजट बढ़ोतरी की मांग की थी। इसे शहबाज शरीफ सरकार ने काफी हद तक मान लिया है।
13 जून, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने शुक्रवार को अपना सालाना बजट पेश किया है। ये बजट कुल 18.77 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए (67.49 अरब डॉलर) का है। बजट में खासतौर से रक्षा खर्च को अहमियत देते हुए 18 प्रतिशत बढ़ाया गया हैं। वहीं विकास कार्यों पर खर्च सीमित करते हुए टैक्स का ऊंचा लक्ष्य रखा गया है। शहबाज शरीफ सरकार ने ऐसे समय बजट पेश किया है, जब वह IMF प्रोग्राम को पटरी पर बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
पाकिस्तान ने पिछले साल रक्षा खर्च के लिए 2.55 ट्रिलियन रुपए रखे थे, जो इस साल से बढ़ाकर 3 ट्रिलियन (तीन हजार अरब) हो गए हैं। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने शुक्रवार को नेशनल असेंबली (संसद) को बताया कि सरकार जुलाई से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में रक्षा के लिए तीन अरब रुपए आवंटित करेगी, जो पिछले साल की तुलना में 18 फीसदी अधिक है। बजट में संघीय विकास खर्च एक ट्रिलियन रुपए रखे गए हैं।
क्षेत्र में अनिश्चितता के कारण देश को अजेय बनाने के लिए रक्षा खर्च में काफी बढ़ोतरी की गई है। रक्षा खर्च में यह बढ़ोतरी सुरक्षा जरूरतों के लिए वित्तीय संसाधनों को एक साथ लाने पर प्रांतों के साथ बातचीत के बाद की गई है। – वित्त मंत्री औरंगजेब
विकास कार्यों की जगह सैन्य मजबूती!
एक्सपर्ट का कहना है कि पाकिस्तान ने रक्षा बजट को 18 प्रतिशत बढ़ाने के लिए विकास कार्यों पर होने वाले खर्च को सीमित किया है। यह दिखाता है कि इस्लामाबाद अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करना चाहता है। साथ ही इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) प्रोग्राम के तहत वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करते हुए आर्थिक दबावों से पार पाने की कोशिश में भी लगा है।
पाकिस्तान ने बीते साल मई में भारत के साथ चार दिन के सैन्य संघर्ष के बाद अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार विकास कार्यों पर होने वाले खर्च को सीमित रखते हुए सैन्य खर्च को प्राथमिकता दे रही है। इसे ऑपरेशन सिंदूर में चोट खाने के बाद असीम मुनीर की सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिश से जोड़ा सकता है। अफगानिस्तान के साथ भी पाकिस्तान का तनाव है।
पाकिस्तान का आर्थिक संकट
शहबाज शरीफ सरकार का यह बजट दिखाता है कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट काफी गहरा है। सरकार कर्ज भुगतान, रक्षा और IMF लक्ष्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि विकास खर्च और मध्यम वर्ग की आय पर दबाव है। सरकार ने 15.26 ट्रिलियन रुपये का टैक्स रेवेन्यू लक्ष्य तय किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 14.13 ट्रिलियन रुपए से 8.2% अधिक है।
इस बजट में 7.02 ट्रिलियन रुपए के संघीय घाटे का अनुमान लगाया गया है, जबकि कुल राजकोषीय घाटा 5.23 ट्रिलियन रुपये या GDP का 3.6% रहने का लक्ष्य है, जिसमें 1.79 ट्रिलियन रुपए का अनुमानित प्रांतीय सरप्लस भी शामिल है। ज्यादातर रेवेन्यू टैक्स और लेवी से आने की उम्मीद है, जिसमें पेट्रोलियम लेवी भी शामिल है।
IMF के सहारे पाकिस्तान
पाकिस्तान सरकार साल 2023 में डिफॉल्ट होने से बचने के बाद 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम को पटरी पर बनाए रखने की कोशिश में है। पाकिस्तान आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए GDP के 2% के प्राइमरी बजट सरप्लस (कर्ज चुकाने के पेमेंट को छोड़कर) का लक्ष्य रखने पर सहमत हुआ है।
पाकिस्तान की सहमति का मतलब है कि सरकार को ब्याज पेमेंट से पहले होने वाले खर्च से ज्यादा कमाई करनी होगी। इससे टैक्स कटौती और कल्याणकारी योजनाओं की गुंजाइश नहीं बचेगी। इस बदलाव का बोझ सैलरी पाने वाले कर्मचारियों और पहले से टैक्स के दायरे में आने वाले बिजनेस पर पड़ेगा।
नवभारत टाइम्स