27 साल में कैसे बदल गई भारतीय सेना की ताकत
Kargil Vijay Diwas: करगिल युद्ध की 27वीं वर्षगांठ पर भारतीय सेना के बदलावों की चर्चा हो रही है। ऑपरेशन विजय के रक्षात्मक मॉडल से आगे बढ़कर ऑपरेशन सिंदूर में हाईटेक और आक्रामक रणनीति अपनाई गई। सेना ने भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड, शक्तिबाण रेजिमेंट, अश्नि प्लाटून और बाज बटालियन जैसी नई इकाइयों के जरिए ड्रोन, स्वॉर्म तकनीक और एकीकृत युद्ध क्षमता को मजबूत किया।

नई दिल्ली: आज यानी 26 जुलाई को देश करगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत की 27 वीं सालगिरह मना रहा है। 1999 की गर्मियों में करगिल की दुर्गम चोटियों में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बेहद मुश्किल जंग को वीरतापूर्वक लड़ा था। पिछले साल मई में इंडियन आर्म्ड फोर्सेस ने फिर से पाकिस्तान को सबक सिखाया। पहलगाम पर हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन करगिल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक काफी कुछ बदल गया। उस हिसाब से अब सेनाएं भी खुद को तैयार कर रही हैं।
रक्षात्मक से आक्रामक तक
करगिल युद्ध यानी ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सिंदूर में फर्क ये था कि ऑपरेशन विजय रक्षात्मक था, वहीं ऑपरेशन सिंदूर आक्रामक। साथ ही युद्ध का तरीका भी पूरी तरह बदल गया। मिलिट्री एक्सपर्ट्स कहते हैं कि युद्ध लड़ने के तरीक के हिसाब से उसकी अलग अलग जनरेशन होती है। जैसे फर्स्ट जनरेशन युद्ध में आमने-सामने की लड़ाई होती है। सेकंड जनरेशन में आमने सामने की लड़ाई के साथ आर्टिलरी गन का भी इस्तेमाल होता है।
थर्ड जनरेशन युद्ध नॉन लीनियर होता है यानी एक जगह पर दुश्मन से सामना और दूसरे जगह से भी उसे घेरना। फोर्थ जनरेशन युद्ध में नंबर के ज्यादा अहम युद्ध लड़ने की तकनीक, तरीका और टेक्टिस होती है। इसमें लड़ाई के तरीके से दुश्मन पर बढ़त बनाई जाती है। इसमें मनुवरिंग (जगह बदलना) अहम होती है। करगिल युद्ध फोर्थ जनरेशन युद्ध था, जिसमें पूरे वेस्टर्न फ्रंट पर फोर्स का इस्तेमाल हुआ और सभी तरह के आर्म्स और आर्टिलरी का इस्तेमाल हुआ। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर इससे आगे का रहा। इसे 4.5 जनरेशन कहा जा रहा है। इसमें सबसे ज्यादा तकनीक का इस्तेमाल हुआ।
बन गई भैरव से लेकर रूद्र तक
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से सेना ने अपनी तैयारियों को तकनीक की ज्यादा धार देना शुरू किया। पिछले करगिल विजय दिवस में तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भैरव बटालियन और रूद ब्रिगेड का ऐलान किया था। अब यह बनकर तैयार हैं। सेना में नई लाइट कॉम्बेट बटालियन भैरव बनाई गई है। ये बटालियन सेना की दूसरी बटालियन से अलग हैं क्योंकि इनमें पैदल सेना के अलावा, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिगनल के भी सैनिक हैं। इसमें कॉम्बेट और कॉम्बेट सपोर्ट सब एक साथ है। इसमें तोप की ताकत है तो फायर सपोर्ट भी है। लॉइटरिंग एम्युनिशन हैं, ड्रोन हैं और साथ ही एयर डिफेंस की भी ताकत है।
शक्तिबाण रेजिमेंट में किया जा रहा तब्दील
सेना में पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में से कुछ रेजिमेंट को शक्तिबाण रेजिमेंट में तब्दील किया गया है। जहां पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में तोप होती हैं वहीं शक्तिबाण रेजिमेंट में ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन हैं। जिससे इनकी रेंज बढ़ती है। सेना में 7 रुद्र ब्रिगेड भी बनाई जा रही हैं। रूद्र ब्रिगेड में इंफ्रेंट्री के साथ ही आर्टिलरी, जरूरत के हिसाब से आर्म्ड या दूसरी आर्म की भी यूनिट हैं।
बनाई गई अश्रि प्लाटून
भारतीय सेना की हर पैदल सेना बटालियन में अश्नि प्लाटून बना दी गई है। ये ड्रोन प्लाटून हैं। यानी सभी बटालियन के पास अब ड्रोन भी हैं और उन्हें चलाने वाले सैनिक भी। साथ ही भारतीय सेना ने एक नया स्पेशलाइज्ड कैडर बनाया है जिसकी जिम्मेदारी सेना के पास मौजूद सभी बड़े ड्रोन की होगी। यानी मिडियम एल्टीट्यूट और ज्यादा एंड्योरेस वाले जो ड्रोन (रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट) हैं, वो इस नए कैडर के सैनिक संभालेंगे। इस बटालियन का नाम बाज बटालियन रखा गया है।
सेना में ब्रिगेड के साइज से बड़ी लेकिन डिविजन से छोटे इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं। पांच IBG और एक फायर सपोर्ट ग्रुप बन गया है। IBG में इन्फेंट्री सैनिकों के साथ इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, टैंक, आर्टिलरी गन और हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं।
पूनम पांडे, डिप्टी ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स