पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित कर दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बताया कि सूची वेबसाइट पर अपलोड करने के साथ सभी राजनीतिक दलों से भी साझा की गई है।
चंडीगढ़: पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने और फाइनल इलेक्टोरल रोल के प्रकाशन की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट छप कर प्रकाशित हो चुकी है और इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों के साथ सीईओ स्तर और जिला स्तर पर यह सूची साझा कर दी गई है। सीईओ अनिंदिता मित्रा ने कहा कि फाइनल इलेक्टोरल रोल का प्रकाशन हो चुका है। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट रोल 13 अगस्त को प्रकाशित किया गया था, जिसमें करीब 1 करोड़ 94 लाख मतदाता पंजीकृत थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 1,93,94,000 के आसपास थी।
प्री-एसआईआर के समय 2 करोड़ 14 लाख वोटर रजिस्टर्ड थे
ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद मतदाताओं से दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं। इसके लिए लोगों से अपील की गई थी कि अगर किसी का नाम इस सूची में रहने से छूट गया है या किसी को नया वोट बनवाना है तो वह संपर्क कर फॉर्म नंबर 6 भर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 8 लाख नए वोटर सूची से जुड़े हैं। इसके बाद फाइनल इलेक्टोरल रोल 2 करोड़ 1 लाख मतदाताओं के साथ प्रकाशित हुआ है। यह ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 3.64 प्रतिशत अधिक है। अनिंदिता मित्रा ने बताया कि एसआईआर शुरू होने से पहले यानी प्री-एसआईआर के समय पंजाब में 2 करोड़ 14 लाख वोटर रजिस्टर्ड थे। जब घर-घर जाकर सत्यापन किया गया तो 20 लाख 66 हजार मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म वापस नहीं आए। इसके पीछे कई कारण थे।

साढ़े पांच लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी
उन्होंने बताया कि सबसे बड़ा कारण मृत्यु है। करीब साढ़े पांच लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए स्वाभाविक रूप से उनका नाम सूची से हटाया जाना था। इसके अलावा 1 लाख 19 हजार ऐसे मामले थे जहां एक ही मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में दो बार दर्ज था। यह क्लेरिकल एरर के कारण हुआ था, इसलिए एक एंट्री को हटाया गया है, किसी की वोट काटी नहीं गई है। इसी तरह करीब 9 लाख लोग ऐसे थे जो परमानेंटली शिफ्ट हो गए थे। आमतौर पर जिन लोगों की ट्रांसफरेबल नौकरी होती है, वे स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाते हैं और वहां उनका नया वोट बन जाता है, लेकिन पुरानी जगह पर भी उनका नाम रह जाता है। कई मामलों में तो पूरी की पूरी कॉलोनी खाली हो गई थी। ऐसे 9 लाख लोगों की गिनती की गई।
कुल 8 लाख नए नाम जुड़े
सीईओ ने बताया कि इन सभी मामलों में मतदाताओं से अनुरोध किया गया था कि अगर किसी का नाम गलती से हटा दिया गया है तो वह दावे और आपत्ति के चरण में आकर फॉर्म नंबर 6 भरकर अपना नाम फाइनल रोल में जुड़वा सकता है। कुल 8 लाख नए नाम जुड़े हैं, जिनमें से करीब 3 लाख ऐसे युवा हैं जो पहली बार 18 साल के हुए हैं। इसका मतलब है कि करीब 5 लाख ऐसे लोग हैं जिनका पहले वोट नहीं बना था या लिस्ट में नाम न होने के कारण उन्होंने नया फॉर्म भरा था।
90 हजार से ज्यादा बीएलए नियुक्त किए गए
राजनीतिक दलों की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में अनिंदिता मित्रा ने कहा कि पंजाब में एसआईआर के दौरान सभी राजनीतिक दलों की भूमिका बहुत सकारात्मक रही है। पहले दिन से ही उनसे अनुरोध किया गया था कि वे बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करें ताकि वे वोटर्स से संपर्क करने में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मदद कर सकें। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों द्वारा 90 हजार से ज्यादा बीएलए नियुक्त किए गए। पंजाब में कोई भी ऐसा बूथ नहीं था जहां एक भी बीएलए न हो। हर बूथ पर किसी न किसी पार्टी के कम से कम एक या दो बीएलए जरूर मौजूद थे।
जो डिलीशन किए गए हैं, वे पूरी तरह जेनुइन
उन्होंने कहा कि जब भी किसी वोटर से बीएलओ का संपर्क नहीं हो पाता था तो तुरंत उन सभी नामों को बीएलए के साथ साझा कर दिया जाता था। कई जगहों पर बीएलए ने वोटर्स से संपर्क स्थापित करवाने में मदद की। इसी वजह से जो डिलीशन किए गए हैं, वे पूरी तरह जेनुइन हैं। मृत्यु के मामलों में उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट कलेक्ट किया गया है। जहां डबल वोट का मामला था, वहां दूसरी एंट्री का वोटर आईडी कार्ड तक चेक किया गया है। जो लोग परमानेंटली शिफ्ट हो गए हैं, उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई है कि वे कहां ट्रांसफर होकर गए हैं, चाहे वह देश के किसी और हिस्से में ही क्यों न गए हों। विभागीय प्रमुखों से भी इसे सर्टिफाई करवाया गया है।
पारदर्शिता से संतुष्ट हैं सभी दल, लगेंगे स्पेशल कैंप
अनिंदिता मित्रा ने बताया कि राजनीतिक दलों ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि वे पंजाब में एसआईआर की प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्हें नहीं लगता कि किसी जेनुइन वोटर का नाम हटाया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि पूरी सावधानी बरती गई है, लेकिन यह एक बहुत बड़ी एक्सरसाइज है। अगर फिर भी कोई मतदाता छूट गया है तो उसके लिए स्पेशल कैंप का आयोजन किया जाएगा। इन कैंपों की तारीख और समय मीडिया, आम लोगों और राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जाएगा।
लोगों को वोटर लिस्ट चेक करवाएंगे
इन कैंपों में सबसे पहले बीएलओ लोगों को वोटर लिस्ट चेक करवाएंगे। हालांकि वोटर लिस्ट ऑनलाइन डाल दी गई है, लेकिन कई लोगों को ऑनलाइन चेक करने में सहूलियत नहीं होती। इसलिए उनकी सुविधा के लिए गांव-गांव में जहां बूथ बने हुए हैं, वहां बीएलओ बैठेंगे और लोगों को लिस्ट चेक करवाएंगे। अगर किसी को लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसका नाम रह गया है तो वह वहीं पर फॉर्म नंबर 6 भर सकता है और उसका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा।
नवभारत टाइम्स