PoJK Protest: PoJK के स्थानीय लोग लंबे समय से गेहूं, आटे और बिजली पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने मुजफ्फराबाद समझौते के तहत इन मांगों को मानने का वादा किया था लेकिन बाद में मुकर गई।
02 जुलाई, 2026 – इस्लामाबाद: क्या पाकिस्तान के नक्शे से PoJK यानि अवैध कब्जे वाला कश्मीर हमेशा के लिए हटने वाला है? रावलकोट के ईदगाह मैदान से आई एक गूंज ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। दरअसल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर PoJK में भारी विद्रोह फूट पड़ा है। हजारों लोग पाकिस्तान की सेना और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PoJK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और वो पाकिस्तानी सेना के जुल्म को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
रावलकोट के ईदगाह मैदान से उठी एक गूंज ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है। हजारों प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में साफ कह दिया है कि PoJK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। इससे इस इलाके पर इस्लामाबाद के कंट्रोल के लिए एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीति के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं।
कौन हैं अमन खान और उनकी ‘भारत वाली’ चेतावनी क्या है?
9 जून से प्रदर्शनकारियों का एक और ग्रुप लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास धरना दे रहा है। लोगों को संबोधित करते हुए PoJK के नेता अमन खान ने इशारा किया कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो स्थानीय लोग भारत के साथ करीबी रिश्ते बनाने की कोशिश कर सकते हैं। अमन खान ने कहा ‘अगर पाकिस्तानी प्रशासन खाने-पीने की चीजों की सप्लाई रोकता रहा तो उन्हें पता होना चाहिए कि PoJK की बाकी सीमाएं खुल सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो इस्लामाबाद को PoJK के लोगों से रुकने की गुजारिश करनी पड़ेगी।’
सरदार अमन खान कश्मीरी पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के एक बेहद प्रभावशाली और मुखर राजनीतिक एक्टिविस्ट और जमीनी नेता हैं। वे इस समय पूरे PoJK में पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना के खिलाफ चल रहे ऐतिहासिक नागरिक आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के वरिष्ठ आयोजक हैं।
अमन खान रावलकोट के ईदगाह मैदान से करीब 70,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ का नेतृत्व करते हुए PoJK में प्रतिरोध का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। पाकिस्तान सरकार ने उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन पर आतंकवाद विरोधी कानून (Anti-Terrorism Act) के तहत प्रतिबंध लगा दिया है और उन्हें देश की ‘मोस्ट वांटेड’ निगरानी सूची (Fourth Schedule) में डाल दिया है।
क्यों मरे 30 से ज्यादा लोग?
आपको बता दें कि रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले कई हफ्तों से अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा हुआ है। इस धरने में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं समेत 70,000 से ज्यादा लोग शामिल हैं। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों (रेंजर्स) ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा बलों की अंधाधुंध फायरिंग में अब तक 30 से ज्यादा स्थानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इस जुल्म के खिलाफ भड़के लोगों ने अब पाकिस्तान से आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
क्यों सुलग रहा है PoJK?
दरअसल PoJK के स्थानीय लोग लंबे समय से गेहूं, आटे और बिजली पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने मुजफ्फराबाद समझौते के तहत इन मांगों को मानने का वादा किया था लेकिन बाद में मुकर गई। उल्टा PoJK के पानी से बनने वाली सस्ती पनबिजली को पाकिस्तान के अन्य प्रांतों जैसे पंजाब और लाहौर में भेजा जा रहा है जबकि स्थानीय लोगों को भारी-भरकम बिजली बिल थमाए जा रहे हैं। इसीलिए आम लोगों का गुस्सा भड़क गया है।
नवभारत टाइम्स