‘जन्नत’ कश्मीर होगा पूरा, एक्सपर्ट के दावे से मुनीर-शहबाज को लगेगी आग
POK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में इन दिनों जमकर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन माने जा रहे हैं। लोग पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। एक्सपर्ट से समझते हैं कि PoK का भविष्य क्या हो सकता है और यह भी समझेंगे कि क्या कभी इसका विलय हो सकता है।

11 जुलाई, 2026 – नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा है। ऐसा गुस्सा पहले कभी नहीं देखा गया है। PoK में जो गुस्सा उबल रहा है, वह बलूचिस्तान और कबायली इलाके के लोगों के प्रदर्शनों से बेहद जुदा है। सड़कों पर हजारों लोग उतर आए हैं और इंसाफ की मांग कर रहे हैं। फील्ड मार्शल असीम मुनीर की फौज इसके बाद भी PoK के लोगों पर जुल्म ढा रही है। नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, चारों तरफ जमीन से घिरे इस इलाके में खाने-पीने की चीजों और दवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों की सप्लाई रोक दी है। इसके चलते आंदोलन के नेताओं ने खुलेआम भारत से दखल देने की मांग की है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान के लिए POK नासूर बन चुका है? क्या PoK के प्रदर्शनों और पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ती नफरत के चलते पाकिस्तानी आका इस इलाके को खुद भारत को सौंप देंगे। एक्सपर्ट से समझते हैं पूरी बात।
POK पाकिस्तान के लिए नासूर, 79 साल साल से विरोध
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि. ) जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान जिस तरह से लगातार PoK में दमन और अत्याचार करता आया है, उससे उसके खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। हाल के दिनों में भारत की ओर से सिंधु जल संधि (IWT) रोके जाने और PoK में तेज हो चुके विरोध प्रदर्शन से पहले से परेशान पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में पाकिस्तान के खिलाफ PoK में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। पाकिस्तान में बीते 79 साल से ये विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
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79 साल POK को संभालने में नाकाम रहा पाकिस्तान
जेएस सोढ़ी के मुताबिक, बीते 79 साल से पाकिस्तान PoK को संभालने में नाकाम रहा है। उसे यह बात हर हाल में समझनी होगी कि PoK भारत का ही हिस्सा था और भारत का ही होकर रहेगा। जिस दिन पाकिस्तान को यह समझ आ जाएगा, वो PoK पर अपना दावा छोड़ सकता है। उसे मजबूर होना पड़ जाएगा, क्योंकि PoK के लोग खुद ही भारत में शामिल हो जाएंगे। भारत समेत पूरी दुनिया में PoK को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा और प्रदर्शन होते रहे हैं। भारत सरकार भी लगातार कहती आई है कि PoK भारत का हमेशा से हिस्सा रहा है। ऐसे में बढ़ते दबाव और चौतरफा प्रदर्शनों के चलते पाकिस्तान PoK को भारत को सौंपने पर मजबूर हो सकता है।
पाकिस्तान को यह बात हर हाल में समझनी होगी कि PoK हमेशा से भारत का ही हिस्सा था और यह एक दिन भारत का ही होकर रहेगा। जिस दिन पाकिस्तान को यह समझ आ जाएगा, वो PoK पर अपना दावा छोड़ सकता है। लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी, डिफेंस एनालिस्ट
PoK को जोर-जबरदस्ती से मिला नहीं सकता है पाकिस्तान: एक्सपर्ट
डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी ने कहा-‘पाकिस्तानी हुकूमत और फौज को यह बात समझनी होगी कि POK को जोर-जबरदस्ती से नहीं मिलाया जा सकता है। PoK के लोग भारत में विलय चाहते हैं। यह बात वो कई बार कह चुके हैं। PoK को जबरन मिलाने की कोशिश से पाकिस्तान के खिलाफ मौजूदा प्रदर्शनों से बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार PoK के लोगों को दोयम दर्जे का समझती है। वहां पर न तो खाना है और न ही पीने का साफ पानी। अस्पताल, स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत भी बदतर है।
पूर्व सोवियत संघ की तर्ज पर पाकिस्तान से टूटेगा PoK
डिफेंस एनालिस्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, पाकिस्तान को PoK उसी तर्ज पर छोड़ना पड़ेगा, जैसा 25 दिसंबर, 1991 को पूर्व सोवियत संघ से टूटकर कई देश अलग हो गए थे। उस दिन पूर्व सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने इस्तीफा दे दिया था। पूर्व सोवियत संघ टूटकर 15 देशों में बंट गया था। PoK भी इसी तर्ज पर पाकिस्तान से टूटकर भारत में जा मिलेगा। यह वक्त की बात है। इतिहास इस तरह के विलय से भरा पड़ा है।
पाकिस्तान ने JAAC को गलत समझा है
- एनडीटीवी पर छपे एक लेख के अनुसार, PoK का संचालन इस्लामाबाद से जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के ऑफिस से होता है। समय-समय पर ‘अंतरिम संविधान’ में संवैधानिक संशोधन किए गए हैं, क्योंकि इसे कश्मीर के साथ ‘फिर से जुड़ना’ है।
- हालांकि, यहां स्थानीय प्रशासन का कम ही चल पाता है। यह बात उन 38 मांगों की लिस्ट से साफ होती है जो इन विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह हैं। इनमें से कोई भी मांग नई नहीं है और ये सालों से चली आ रही हैं, लेकिन 2023 में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बनने के बाद इन्हें एक साथ लाया गया।
JAAC में कौन-कौन लोग हैं शामिल
JAAC कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और इसके सदस्य वे लोग हैं जो रोजमर्रा की समस्याओं से जूझते हैं। जैसे ट्रांसपोर्टर, दुकानदार वगैरह। इसका सबूत उन लोगों की लिस्ट है जिन्हें इनका समर्थन करने के लिए सजा दी गई है। इनमें निचले स्तर के सरकारी कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें शिक्षा विभाग के 42 लोग, स्वास्थ्य विभाग के 12, बिजली और लोक निर्माण विभागों से पांच-पांच, स्थानीय सरकार और ग्रामीण विकास विभाग से तीन और कृषि और वन विभागों से दो-दो लोग शामिल हैं।
PoK में क्या जुल्म ढा रहा पाकिस्तान
PoK में रिटायर हो चुके टीचरों की पेंशन भी रोक दी गई है। इसके नेता भी मध्यम-वर्गीय परिवारों से हैं। जैसे सरदार अमन खान, जिन पर भारत से दखल की मांग करने के बाद करीब एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा गया है। पंजाब यूनिवर्सिटी के वकील ख्वाजा मेहरान, जिनका आसानी से बचना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान सेना पर कश्मीरियों को बंदूकें देने का आरोप लगाया था और अब गिरफ़्तार हो चुके शौकत नवाज मीर, जो पहले ट्रेड यूनियन नेता थे।
PoK के लोगों की मांगें क्या हैं
- एक मांग है पिछले दो सालों में विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए मुआवज़ा। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन पर आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों का विरोध करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई थी।
- एक और मांग राजनीतिक रूप से संवेदनशील थी। स्वायत्त क्षेत्र की विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था को खत्म करना। ये वे लोग हैं जो भारत से आकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों खासकर पंजाब में बस गए थे। इनमें से ज्यादातर लोग कभी PoK गए ही नहीं।
- यह बात इस्लामाबाद और मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के लिए फायदेमंद है, जो इस हिस्से को अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने लायक समझती हैं। चुनाव क्षेत्रों में भी भारी असंतुलन है; जम्मू शरणार्थी सीटों के लिए लगभग 4.3 लाख वोटर हैं, जबकि कश्मीर घाटी में शरणार्थी सीटों के लिए सिर्फ़ 30,000 वोटर हैं।
PoK ‘आजाद’ हुआ तो पाकिस्तान का अंत
अन्य मांगों में मीरपुर में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेहतर अस्पताल सुविधाएं, प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर कम टैक्स और जर्जर बिजली नेटवर्क को ठीक करने के लिए 10 अरब रुपये का आवंटन शामिल है। भले ही PoK पाकिस्तान की बिजली का मुख्य स्रोत है और मुख्य इलाके को भरपूर पनबिजली क्षमता देता है, फिर भी वहां लगातार बिजली कटौती होती रहती है। अगर PoK ‘आजाद’ हो जाता है, तो यह सचमुच पाकिस्तान के अंत की शुरुआत हो सकती है।
भारत का PoK को लेकर क्या कहना है
भारत हमेशा से PoK को अपना मानता आया है। उसके नक्शे में PoK शामिल है। हालांकि, PoK में दखल को लेकर भारत दूरी बनाए हुए है। चूंकि दिल्ली PoK को अपना इलाका मानती है, इसलिए उसे कम से कम मानवीय आधार पर दखल देने का अधिकार है।
दूसरा, दूसरे देशों पर दबाव डालने का विकल्प भी है। PoK के समर्थन में पूरे UK और न्यूजीलैंड में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इससे इस्लामाबाद पर दबाव बनाने के लिए गुंजाइश बन सकती है कि वह JACC नेताओं को जेल में डालने के बजाय कम से कम उनसे बातचीत करे।
भारत से खुलकर मांगी जा रही है मदद
जैसे-जैसे JACC के बड़े नेता अब खुलकर भारत से मदद मांग रहे हैं, सुरक्षा का खतरा और बढ़ेगा। बहुत कम लोग यह समझते हैं या खुलकर मानते हैं कि कश्मीर असल में पाकिस्तान की ‘जीवनरेखा’ (jugular vein) है। यही वजह है कि इस इलाके में पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति दशकों से चल रही है। ज़ाहिर है, पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि के तहत भारत का 80 फीसदी पानी देना भी काफी नहीं है। वह सारा पानी चाहता है।
नवभारत टाइम्स