‘एक भी वोट नहीं डाले गये’, पोलिंग बूथ पर मक्खी मारते रहे चुनावी अधिकारी
PoK Election: स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों पर आरोप लगाया है कि वे स्थानीय लोगों की समस्याओं को हल करने के बजाय सत्ता और विशेषाधिकार पाने की कोशिश कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वोटरों के न आने की वजह से पोलिंग स्टाफ को लंबे समय तक खाली बैठना पड़ा।
17 अगस्त, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इलेक्शन के दौरान कई पोलिंग स्टेशन पर एक भी वोट नहीं डाले गये हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के बहिष्कार के आह्वान के वोटरों ने ‘फर्जी चुनाव’ से पूरी तरह से दूरी बनाई रखी। इस दौरान पोलिंग बूथ पर भारी सुरक्षाकर्मी तैनात थे। जांच किए गए नौ पोलिंग बूथों में से कम से कम तीन पर एक भी वोट नहीं पड़ा जबकि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने माना कि कुछ पोलिंग जगहों के आस-पास की सड़कें पूरी तरह से खाली थीं।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक बाग-2, मलोट और बारा बारी समेत कई पोलिंग स्टेशनों पर पोलिंग स्टाफ और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद वोटर या तो गिनी चुनी संख्या में पहुंचे या बिल्कुल भी नहीं पहुंचे। आपको बता दें कि पीओके में पिछले करीब तीन महीने से प्रदर्शन हो रहे हैं जिसपर पाकिस्तानी सेना ने कई बार अंधाधुंध गोलीबारी की है जिसमें सौ से ज्यादा लोग मारे गये हैं। स्थानीय लोगों ने चुनाव को पूरी तरह से ‘ड्रामा और दिखावा’ कहा है।
पीओके इलेक्शन में चुनाव का बहिष्कार कामयाब
स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों पर आरोप लगाया है कि वे स्थानीय लोगों की समस्याओं को हल करने के बजाय सत्ता और विशेषाधिकार पाने की कोशिश कर रही हैं। वोटरों के न आने की वजह से पोलिंग स्टाफ को लंबे समय तक खाली बैठना पड़ा। वो दिन भर ‘मक्खी मारते दिखे।’ कई पोलिंग स्टेशन पर लोग वोट देने के बजाय विरोध करने के लिए काले झंडे लहराते और पोलिंग बूथ के पास इकट्ठा होते भी देखे गए।
हालांकि जिन बूथों पर जीरो वोटिंग की खबर है वे कुछ खास पोलिंग लोकेशन हैं और इनसे पूरे PoK में वोटिंग के पूरी तरह बहिष्कार का संकेत नहीं मिलता। दूसरे पोलिंग स्टेशनों पर वोटिंग हुई और अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी में काफी अंतर रहा। यह बहिष्कार अभियान PoK में चल रहे व्यापक राजनीतिक तनाव के बीच हो रहा है, जिसमें JAAC चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहा है और पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों पर आपत्ति जता रहा है।
पीओके में इलेक्शन पर पाक फौज का ढोंग बेनकाब
न्यूज 18 ने भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह बहिष्कार इस्लामाबाद के कंट्रोल और उस चुनावी ढांचे के प्रति बढ़ते असंतोष को दिखाता है जिसमें स्थानीय प्रतिनिधित्व के बजाय शरणार्थियों की सीटों को प्राथमिकता दी जाती है। सूत्रों ने यह भी दावा किया कि जमीनी रिपोर्टों से पता चलता है कि मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ PoK में सेना समर्थित राजनीतिक व्यवस्था से भी लोगों की दूरी बढ़ रही है।
नवभारत टाइम्स