Sindhudesh: ‘वहदत-ए-सिंध’ का मतलब होता है ‘अविभाजित सिंध’। इस नाम से आंदोलन शुरू करने का मकसद पाकिस्तानी सेना का वो फैसला है जिसके तहत पूरे पाकिस्तान को 12 अलग अलग प्रांतों में विभाजित करने की योजना है।
25 अगस्त, 2026 – इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले तीन महीनों से चल रहे प्रदर्शन के बाद अब सिंध प्रांत में अलग ‘सिंधुदेश’ बनाने की मांग ने तेजी पकड़ ली है। यहां के राजनीतिक दलों ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान सरकार के फैसलों से उनके इलाकों की जमीन, पानी और प्राकृतिक संसाधनों को खतरा है।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सिंध एक्शन कमिटी (SAC) के बैनर तले हैदराबाद में एक बड़ा ‘वहदत-ए-सिंध मार्च’ का आयोजन किया गया जिसमें कई सिंधी राष्ट्रवादी पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। न्यूज 18 के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और पाकिस्तानी सेना दोनों को ही निशाना बनाया है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) का भी विरोध किया है क्योंकि उनका आरोप था कि पार्टी सिंध के भौगोलिक और आर्थिक हितों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
हैदराबाद में ‘वहदत-ए-सिंध’ मार्च क्या था?
‘वहदत-ए-सिंध’ का मतलब होता है ‘अविभाजित सिंध’। इस नाम से आंदोलन शुरू करने का मकसद पाकिस्तानी सेना का वो फैसला है जिसके तहत पूरे पाकिस्तान को 12 अलग अलग प्रांतों में विभाजित करने की योजना है। पाकिस्तान में इस वक्त चार प्रांत हैं पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। असीम मुनीर की योजना इन प्रांतों को 12 हिस्सों में बांटना है। इसका मकसद इन देशों में उठने वाली आजादी की मांग और आतंकवाद को खत्म करना है। शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो इस फैसले के खिलाफ हैं लेकिन माना जा रहा है कि सेना ने उन्हें अल्टीमेटम दे रखा है।
यह मार्च हैदराबाद के पूनम चौक से शुरू हुआ और वधू वाह में हैदराबाद बाईपास की ओर बढ़ा। इसमें सिंध यूनाइटेड पार्टी, अवामी तहरीक और जीए सिंध कौमी महाज के नेताओं ने हिस्सा लिया। विरोध कर रहे समूहों ने सिंध के अंदर नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने के प्रस्तावों का विरोध किया और PPP और PML-N पर प्रांत की भौगोलिक अखंडता के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने जलालपुर नहर परियोजना और कॉर्पोरेट खेती की पहलों पर भी आपत्ति जताई और तर्क दिया कि ऐसे कदमों से जमीन और जल संसाधनों पर सिंध के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
सिंध क्या बलूचिस्तान के रास्ते पर आगे बढ़ेगा?
आपको बता दें कि बलूचिस्तान पहले से ही पाकिस्तान से अलग होने के लिए हिंसक रास्ता अख्तियार कर चुका है। बलूच हर दिन पाकिस्तानी सेना के जवानों को मार रहे हैं। अब सिंध प्रांत में भी यही मांग शुरू हो चुकी है। सिंध के बंटवारे के विरोध में प्रांत के कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं। मिठी में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प होने से तनाव बढ़ गया। ये विरोध-प्रदर्शन तब हुए जब PPP ने सिंध के बंटवारे के किसी भी प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह के खिलाफ नारे लगाए।
नवभारत टाइम्स